*फूलबेहड़ के प्रा.वि. ग्रंट नं. 10 में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष निर्माण में धांधली का आरोप, 11 लाख में से 5 लाख में बना घटिया भवन, ग्रामीणों ने जांच की मांग की*

लखीमपुर खीरी , 0

(हरिशंकर मिश्र)

*लखीमपुर खीरी :* बेसिक शिक्षा विभाग में निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ब्लॉक फूलबेहड़ के प्राथमिक विद्यालय ग्रंट नंबर 10 में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष के निर्माण में भारी गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया है।

*क्या है आरोप:*  
सरकार द्वारा विद्यालय में एक अतिरिक्त कक्षा-कक्ष निर्माण के लिए 11 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रुति श्रीवास्तव ने मानक के विपरीत घटिया सामग्री से निर्माण कराया है। 

ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भवन की नींव, दीवार और छत में सीमेंट का अनुपात बेहद कम रखा गया और बालू ज्यादा मिलाई गई। आरोप है कि करीब 5 लाख रुपये में ही कक्षा-कक्ष खड़ा कर दिया गया और शेष 6 लाख रुपये का बंदरबांट कर लिया गया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण को पास करने वाले अधिकारी भी जांच के नाम पर खानापूर्ति करते हैं।

*एमडीएम और शिक्षण पर भी सवाल:*  
1. *मिड-डे-मील*: आरोप है कि बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है। साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार मिलने वाला दूध भी पानी मिलाकर दिया जाता है। कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि दूध का एक हिस्सा स्टाफ अपने साथ ले जाता है।
2. *शिक्षण व्यवस्था*: ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में नियमित पढ़ाई नहीं होती। शिक्षक समय से नहीं आते और स्कूल में शैक्षणिक कार्य के बजाय अन्य गतिविधियों में समय व्यतीत करते हैं। चूंकि स्कूल में अधिकतर गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए कोई शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।
3. *रंगाई-पुताई*: कायाकल्प योजना के तहत होने वाली रंगाई-पुताई में भी निम्न गुणवत्ता की सामग्री प्रयोग करने का आरोप है।

*ग्रामीणों का कहना है कि:*  
1. जिलाधिकारी तकनीकी टीम से निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराएं।
2. एमडीएम की गुणवत्ता और वितरण की औचक जांच हो।
3. दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ रिकवरी और विभागीय कार्रवाई की जाए।
4. निर्माण कार्य मानक के अनुसार दोबारा कराया जाए।

*क्या कहते हैं नियम:*  
अतिरिक्त कक्षा-कक्ष का निर्माण स्कूल प्रबंध समिति की देखरेख में मानक एस्टीमेट के अनुसार होना चाहिए। नींव, बीम, छत, दरवाजे-खिड़की सभी के लिए पीडब्ल्यूडी के मानक तय हैं। एमडीएम में प्रति छात्र निर्धारित मात्रा और कैलोरी का ध्यान रखना अनिवार्य है।
 विभागीय जांच में वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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