*वाहनों की तेज एलईडी हैवी लाइट व तेज रफ्तार बन रही हादसों का बड़ा कारण*

लखीमपुर खीरी , 198

(केके शुक्ला/हरिशंकर मिश्र)


*लखीमपुर खीरी।* सड़कों पर वाहनों की तेज, अनियंत्रित LED और हैवी लाइटें अब देशव्यापी समस्या बन चुकी हैं। रात के समय सामने से आने वाली तीखी रोशनी चालकों की आंखें चौंधिया देती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञ इसे “नाइट ब्लाइंडनेस” की बड़ी वजह मान रहे हैं।  

*पहले था समाधान, अब बढ़ गई समस्या*
करीब 15-20 साल पहले तक वाहनों की हेडलाइट के ऊपरी हिस्से को आधा काले रंग से पोत दिया जाता था। इससे रोशनी का सीधा प्रभाव सामने वाले की आंखों पर नहीं पड़ता था। उस समय बल्ब की रोशनी भी अपेक्षाकृत कम तीखी होती थी, जिससे रात में भी सुरक्षित ड्राइविंग संभव थी।  

लेकिन LED तकनीक के आने के बाद स्थिति बदल गई। LED लाइटें कम बिजली में अधिक रोशनी देती हैं, लेकिन इनकी रोशनी सफेद, केंद्रित और बेहद तेज होती है। बिना डिफ्यूजर और सही एंगल के ये सीधे सामने वाले चालक की आंखों पर पड़ती हैं। कुछ सेकंड के लिए चालक को कुछ भी दिखाई नहीं देता और इसी दौरान हादसे हो जाते हैं।  

*दोपहिया चौपहिया और पैदल यात्री सभी होते प्रभावित*  
जनमानस में हो रही चर्चाओं के अनुसार, LED और हैवी लाइटों से सबसे ज्यादा खतरा दोपहिया,छोटे चौपहिया चालकों, साइकिल सवारों और पैदल यात्रियों को होता है। हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर बिना डिपर इस्तेमाल करने वाले भारी वाहनों के कारण रात में दुर्घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई जगहों पर तो लोग रात में यात्रा करने से बचने लगे हैं। इसके साथ ही तेज रफ्तार दुर्घटनाओं के संभावनाओं को और बढ़ा देती है।

*पुराना उपाय फिर चर्चा में*  
सड़क सुरक्षा से जुड़े बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर वर्तमान में भी हेडलाइट के ऊपरी हिस्से को आधा काले रंग से पेंट किया जाए, या मानक के अनुरूप लो बीम और हाई बीम का अनिवार्य इस्तेमाल हो, तो दुर्घटनाओं में काफी कमी आ सकती है। कुछ राज्यों में पुलिस द्वारा अवैध और तेज LED लाइटों के खिलाफ अभियान भी चलाए जा रहे हैं, लेकिन यह समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है।  

*प्रशासन से उठ रही कार्रवाई की मांग*  
 बुद्धिजीवी नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि परिवहन विभाग और पुलिस को वाहनों में मानक से अधिक तेज लाइटों पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए। साथ ही वाहनों की फिटनेस जांच में लाइटों के एंगल और तीव्रता को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।  

सड़क सुरक्षा के बारे में नागरिकों का मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल सुविधा के लिए होना चाहिए, न कि जान जोखिम में डालने के लिए। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो रात की सड़कें और भी असुरक्षित हो जाएंगी।

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