65 गीतों का अनुपम काव्य संग्रह "यादों जड़ी किताब"।

अन्य खबरे , 213

लखनऊ।
  उत्तर प्रदेश शासन में उप सचिव के पद पर कार्यरत श्रीमती पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव की कृति "यादों जड़ी किताब"  65 गीतों का एक ऐसा अनुपम काव्य संग्रह है जिसमें विविध वर्ण एवं सुगंध से ओतप्रोत पुष्पों की छटा देखते ही बनती है।
      पद्मश्री विद्या बिंदु जी के शब्दों में "इस संग्रह में कहीं-कहीं गुदगुदाती सुखद सुधियां हैं जो जीवन में मधुर संगीत का रस घोल जाती हैं तो कहीं "जिंदगी के कैनवस" को स्वयं ही रंग-बिरंगे रंगों से सजाने की चाह है, कभी "दिल की डायरी" के पृष्ठ आह्लादित कर जाते हैं तो कहीं "प्रेम की पाती" मृदुल सुधियों  से मन को सहला जाती है। कहीं "मायावी दुनिया" का भय है, कहीं "बारिश की बूंदे" आनंदित करती हैं तो कहीं "मन की पीड़ा" विचलित कर जाती है। बचपन की ओर लौटना बेहद सुकून दे जाता है, लता जी का जाना गीत की गंगा की विदाई जैसा लगता है। कवयित्री ने अपनी कविताओं में एक अलग और विशिष्ट साहित्य आकाश रचने का प्रयास किया है। इन कविताओं में एक और जीवन दर्द का पर्याय लगता है तो दूसरी ओर एक आश्वासन भी है जो हार नहीं मानने देता।"

Related Articles

Comments

Back to Top