साजिशन प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज ना करने का प्रकरण पहुंचा पुलिस कप्तान के समक्ष

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कन्नौज : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कानून – व्यवस्था के चाकचौबंद होने के तमाम दावों के बावजूद ऐसे – ऐसे मामले उजागर होते रहते है जो पुलिस के कार्य – व्यवहार पर सवालिया निशान लगा देते है। मामला कन्नौज जनपद के तिर्वा थाने का है ,जहां सखौली ग्राम के नागरिक प्रदीप कुमार और संदीप कुमार के ऊपर 07 मार्च को रात 10 बजे हमला हो गया था , जब वे अपनी कार यू पी 74 सी 4935 से व्यवसायिक कार्य निपटा करके आ रहे थे। रजईमऊ राजा सर्विस रोड आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे ओवरब्रिज पर जब प्रदीप कुमार और संदीप कुमार अपनी कार से निकले तब पहले से घात लगाए बदमाशों ने तमंचे से उनके ऊपर फायर कर दिया। दोनों भाई प्रदीप कुमार और संदीप कुमार तो बच गए लेकिन गोली गाड़ी का सीसा तोड़ते हुए सीट से लगी। 
                      इसके बाद शुरू होता है प्रताड़ना का वह खेल जिसमें दोनों भाई कन्नौज से लेकर लखनऊ तक दौड़ लगा रहे है लेकिन अभी तक प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं हो पाई हैं। हमले के बाद से ही दोनों भाई लिखित प्रार्थनापत्र लेकर प्रभारी निरीक्षक : तिर्वा से मिले लेकिन उनका व्यवहार ऐसे था जैसे कि हमले की शिकायत करना ही अपराध है। इसके बाद प्रदीप कुमार पुलिस अधीक्षक कन्नौज से मिले और उन्होंने 14 मार्च को उनका प्रार्थनापत्र प्रभारी निरीक्षक : थाना तिर्वा को अग्रसारित कर दिया। जब इसी क्रम में प्रदीप कुमार – संदीप कुमार प्रभारी निरीक्षक : थाना तिर्वा से मिले तो उनके साथ – साथ पुलिस चौकी प्रभारी : मेडिकल कालेज ने उनके ऊपर एफआईआर दर्ज ना करवाने का दबाव बनाया जिसे प्रदीप ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद प्रभारी निरीक्षक : थाना तिर्वा ने अपने कार्यालय में प्रदीप के ऊपर दबाव डालकर प्रार्थनापत्र बदलवाने का प्रयास किया। पुलिस चौकी प्रभारी : मेडिकल कालेज ने तो यहां तक कह दिया कि  ज्यादा एफआईआर – एफआईआर करोगे तो उल्टा किसी मामले में फंसाकर दोनों भाइयों की जिंदगी बर्बाद कर दिया जाएगा। 15 मार्च को स्वयं इस संवाददाता ने पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज ना करने का कारण पूछना चाहा तो हर बार फोन उनके पीआरओ ने उठाया और उन्होंने केवल गुमराह किया। पुलिस अधीक्षक के पीआरओ से बात करने के बाद प्रभारी निरीक्षक तिर्वा ने जब दोनों हमले के शिकार भाइयों  प्रदीप – संदीप को पुन: थाने पर बुलवाया तब थाने में समाजवादी पार्टी के कोई नेता मुनेश खुलेआम पीड़ित प्रदीप – संदीप को धमकाते रहे और प्रभारी निरीक्षक चुपचाप देखते रह गए। कार्रवाई के नाम पर प्रदीप और संदीप को तीन घंटे थाने पर बैठाया गया और लगातार इस बात के लिए दबाव बनाया गया कि शिकायत वापस ले लो। 

                    परेशान प्रदीप कुमार ने स्वयं के ऊपर हुए हमले को लेकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाने हेतु कानपुर परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक को स्पीड पोस्ट से प्रार्थनापत्र भेजा।इसके अलावा आईजीआरएस के अंतर्गत भी प्रार्थनापत्र भेजा लेकिन जांच की जिम्मेदारी तिर्वा थाने /पुलिस चौकी प्रभारी :मेडिकल कालेज को ही मिली जो कि उनके ऊपर हुए हमलों के दोषियों का लगातार बचाव कर रहे थे। जिले पर कोई सुनवाई नहीं हो रही थी जिससे परेशान होकर प्रदीप कुमार ने अप्रैल माह में लखनऊ में रहने वाले पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता नैमिष प्रताप सिंह से संपर्क किया और उनको अपनी समस्या से अवगत कराया। इसके बाद उन्होंने 19 अप्रैल को अपर मुख्य सचिव (गृह) के समक्ष उनके ऊपर हुए हमले और उनके परिवार की सुरक्षा से संबंधित प्रार्थनापत्र रखा लेकिन क्या कार्रवाई हुई यह नहीं पता चल पाया।अपर मुख्य सचिव (गृह) के यहां से कोई जानकारी न मिलने पर नैमिष प्रताप सिंह ने गृह सचिव से मुलाकात किया और उनके प्रार्थनापत्र पर गृह सचिव ने पत्रांक 90/एच.एस.(पी.)/2022 ) के जरिए 29 अप्रैल को अपर पुलिस महानिदेशक ( कानपुर जोन )के यहां उनका प्रार्थनापत्र अग्रसारित कर दिया।गृह सचिव के यहां से अग्रसारित हुए प्रार्थनापत्र के आधार पर 18 मई को अपर पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में प्रदीप कुमार का बयान नोट किया गया। इसके बाद 29 मई को पुन: अपर पुलिस अधीक्षक के यहां से प्रदीप कुमार को फोन आया जब प्रदीप कुमार उनके निर्देशानुसार 30 मई को उनके कार्यालय गए और उन्होंने अपने ऊपर हुए हमले को लेकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाने के संदर्भ में जानने का प्रयास किया तब उसने कहा गया कि आरोपियों के मोबाइल की लोकेशन निकाली जाएगी तभी कोई कार्रवाई होगी। इसके बाद उनको  बाहर बैठने के लिए कह दिया गया और लगभग 2 घंटे बैठे रहने के बाद जब उनसे कोई पूछताक्ष नहीं हुई तब वे वापस चले आए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक जांच की कोई प्रक्रियां शुरु नहीं हुई है।यहां तक कि प्रदीप कुमार की जिस कार पर फायर हुआ था उसको विवेचक या किसी अन्य पुलिसकर्मी ने देखना तक जरूरी नहीं समझा। 
                           इस मामले में सबसे खतरनाक विंदु यह है कि प्रदीप कुमार और उनके भाई पर जान से  मारने के लिए हमला किया गया जिस पर उनकी प्रथम सूचना रिपोर्ट तक नहीं लिखी गई।इसके बाद जब उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत किया तब थानाध्यक्ष तिर्वा ने मनमानीपूर्ण तरीके से दुकान को खाली करने के नाम पर विवाद करने और उससे कथित तौर पर शांति भंग की संभावना के आधार पर इस तरह से रिपोर्ट लगाया कि जिसके आधार पर न्यायालय उप जिला मजिस्ट्रेट तिर्वा द्वारा धारा 107/116 दं. प्र. सं.की कार्रवाई कर दिया गया , जबकि उक्त दुकान को प्रदीप कुमार ने 10 महीने पूर्व ही खाली कर दिया था। इसके साथ – साथ प्रदीप राठौर ने अग्रिम शुल्क के रूप में जो रु.100000/– लिया था,उसे भी जबरिया वापस नहीं कर रहे हैं। अब प्रदीप कुमार का कहना है कि  07 मार्च 2022 को उनके और उनके भाई संदीप कुमार पर हुए हमले के जिम्मेदार विपक्षी विष्णु राठौर , प्रांशु राठौर , हिमांशु राठौर व अन्य उनके खिलाफ तरह – तरह की साजिश रचते रहते है और गिरोह बनाकर कोई बड़ी घटना को अंजाम देना चाहते है। स्थानीय तिर्वा थाने पर इन लोगों की कोई सुनवाई नहीं हुई और पूर्व में जब  पुलिस अधीक्षक से प्रदीप कुमार ने अपने और अपने परिवार को अपराध – अन्याय का शिकार बनाए रखने की शिकायत की तो इसकी अनदेखी की गई जिससे उनका पूरा परिवार भयभीत और आतंकित है। सवाल उठता है कि पुलिस चौकी प्रभारी : मेडिकल कालेज और प्रभारी निरीक्षक : तिर्वा हमलावरों के खिलाफ  प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय पूरे मामले को क्यों टालते रहे?हमलावरों  से तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक तिर्वा को इतनी सहानुभूति क्यों थी ? पीड़ित पक्ष का प्रार्थनापत्र क्यों बदलवाने का प्रयास किया गया ?इसके बाद जब पूरा मामला कन्नौज के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के पास पहुंच गया है तब उन्होंने पीड़ितों की सुनवाई क्यों नहीं किया? यह स्थिति तब है जब प्रदीप कुमार – संदीप कुमार के ऊपर हुए हमले में एक व्यक्ति हिमांशु भी शामिल है जो मु.अ.सं0329/2020धारा363,366,120बी.354,328 व7/8 पाक्सो एक्ट थाना : तिर्वा में भी आरोपी था जिसका पुलिस ने मिलीभगत करके विवेचना से नाम निकाल दिया था जबकि इसमें  मा. मुख्यमंत्री जी के विशेष सचिव ने 27/11/2020 को जांच करके प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।  

                          कन्नौज में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और फिर उनके बाद आए पुलिस अधीक्षक का स्थानांतरण हो चुका है।अब नए पुलिस अधीक्षक आ चुके है। 07 मार्च को प्रदीप कुमार और संदीप कुमार पर हुए हमले को लेकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज न करने का मामला उनके पास पहुंच चुका है। क्या अब प्रदीप कुमार और उनके भाई संदीप कुमार पर हुए हमले को लेकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होगी या पूर्व की तरह से मामले को टाला जायेगा? इसके अलावा क्या प्रदीप कुमार और उनके भाई पर हुई हमले को लेकर अभी तक सक्षम कानूनी कार्रवाई न होने का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए जिम्मेदार के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी ? क्या प्रदीप कुमार और उनके परिवार की अपराधियों और उनसे मिलीभगत करने वाले  तिर्वा थाने के पुलिसकर्मियों से सुरक्षा सुनिश्चित की जायेगी ? क्या प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज न करने , रुपया लेकर विवेचना में आरोपियों का नाम निकालने , अपराधियो से मिलकर शोषित – पीड़ित जनता को परेशान करने के लिए कुख्यात तिर्वा थाने में कुछ सुधार होगा या सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहेगा ? 

*** नैमिष प्रताप सिंह

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