अदभुत कुटी : चौरासी कुटी

परिवेश , 649

ध्यान योग के लिए विश्व विख्यात महर्षि महेश योगी ने वर्ष 1961 में स्वर्गाश्रम यानी ऋषिकेश के पास वन विभाग से 15 एकड़ भूमि लीज पर लेकर यहां शंकराचार्य नगर की स्थापना की थी. यहां उन्होंने अदभुत वास्तुशैली वाली चौरासी छोटी-छोटी कुटियों और सौ से अधिक गुफाओं का निर्माण कर इस जगह को ध्यान-योग केंद्र के रूप में विकसित किया.

विश्व प्रसिद्ध  बैंड बीटल्स के गुरु महेश योगी के आश्रम के रूप में जाना जाने वाला योगनगरी ऋषिकेश का नामचीन पर्यटन पर्यटन स्थल है.  साठ साल पहले बना यह विश्व प्रसिद्ध आश्रम वर्तमान में पुरातत्व महत्व का पर्यटन स्थल लगता है. 
र्ष 1961 में महर्षि महेश योगी ने राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 7.5 हेक्टेयर वन भूमि में चौरासी कुटिया आश्रम का निर्माण किया था। उन्होंने करीब 40 वर्षों के लिए वन भूमि को लीज पर लिया था. इस दौरान उन्होंने आश्रम में 140 गुंबदनुमा कुटिया और 84 छोटी-छोटी ध्यान योग की कुटिया व अन्य निर्माण किया था. वर्ष 1968 में इंग्लैंड का मसहूर बीटल्स ग्रुप के चार सदस्य जॉन लेनन, पॉल मकार्टनी, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार चौरासी कुटिया में ध्यान, योग करने के लिए आए थे.

ये लोग कुटिया नंबर नौ में ध्यान करते थे. वे यहां करीब चार महीने रुके थे. इन चार महीनों में उन्होंने यहां 40 गानों की धुन तैयार किया था, जिन्हें विदेशी आज भी मंत्रमुग्ध होकर सुनते हैं. वन भूमि की लीज समाप्त होने के चलते महर्षि महेश योग इस कुटिया को वर्ष 1989 में छोड़कर हॉलैंड चले गए. वर्ष 2000 में वन विभाग ने इस आश्रम का  अधिग्रहण कर लिया.
आठ दिसंबर 2015 को पार्क प्रशासन ने इस कुटिया को देशी, विदेशी पर्यटकों के लिए खोल दिया. इसमें पार्क प्रशासन ने यहां देशी विदेशी पर्यटकों के लिए निर्धारित शुल्क लगा दिया. बीते पांच वर्षों में यह कुटिया पार्क प्रशासन के लिए मील का पत्थर साबित हुई. पार्क प्रशासन ने यहां से करोड़ों रुपये का राजस्व कमाई हुई है . वर्ष 2015 में 2.52, वर्ष 2016 में 18.89, वर्ष 2017 में 20.33,  वर्ष 2018 में  50.51, वर्ष 2019 में 45.21, वर्ष 2020 से लेकर अब तक 24 लाख रुपये की आय हुई है 

चौरासी कुटिया को पूरी तरह से संवारने  सजाने  का प्रयास किया जा रहा है. पर्यटकों के लिए आश्रम परिसर में शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की जा रही है .दुनिया भर में देवभूमि उत्तराखंड  स्थित ऋषिकेश को योग नगरी के रूप में जाना जाता है. यहां पर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ऋषिकेश को योग नगरी के रूप में पहचान दिलाने वाली जगह करीब 30 साल तक गुमनामी में रही.
 ऋषिकेश को आज योग और अध्यात्म की नगरी के रूप में विश्व पटल पर पहचान मिली है. दुनिया के कोने-कोने में ऋषिकेश को योग नगरी के रूप में जाना जाता है. भावातीत ध्यान योग के प्रणेता महर्षि महेश योगी) द्वारा बसाए गए शंकराचार्य नगर यानी चौरासी कुटी की कई खाससियत है. 
राजाजी टाइगर रिजर्व बनने के बाद शंकराचार्य नगर यानि चौरासी कुटी  को आम आदमी के प्रवेश के लिए बंद कर दिया गया था. समय के साथ यहां जंगल उग आया और पूरी धरोहर खंडहर में बदल गई. मगर, 29 साल बाद जब इसे पर्यटकों के लिए खोला गया तो यह स्थान पर्यटकों की पसंदीदा जगह बन गई
यहां बने भवन आज भी वास्तु कला के अद्भुत नमूने हैं. जो उस वक्त जापान की तकनीकी पर बनाए गए थे. यह सभी भवन और कुटिया भूकंपरोधी हैं, जो खंडहर हाल होने के बावजूद भी अपनी बुलंदियों का गवाह बने हुए हैं.
उस दौर में ऋषिकेश में महर्षि महेश योगी के अलावा डा. स्वामी राम, स्वामी शिवानंद जैसे संत भी योग शिक्षा के लिए जाने जाते थे. मगर, चौरासी कुटी योग और ध्यान का अनोखा केंद्र बन गया था.

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