देश के समग्र विकास में योगदान देने के लिए आगे आएं विद्यार्थी : डा दिनेश शर्मा

जनपत की खबर , 378

*दीक्षान्त समारोह, हासिल की गई शिक्षा को समाज को समर्पित करने का अवसर*

*जीवन में उत्साह बना रहना चाहिए*

*उत्साह योग्यता के संवर्धन में सहायक*

*सरकार रोजगारपरक शिक्षा व संस्कृत शिक्षा को दे रही है प्रोत्साहन*

*डिजिटल लाइब्रेरी व आनलाइन सम्बद्धता के लिए उच्च शिक्षा विभाग को मिलेगा CSI SIG eGoovernance award*

*जनविश्वास यात्राओं में उमडी भीड से विपक्ष में हताशा*

*केन्द्र व राज्य सरकार के विकास कार्यों के प्रति जनता में जबरदस्त उत्साह*

 


लखनऊ / प्रयागराजः      
               उपमुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी, देश के समग्र विकास में योगदान के लिए आगे आए। उनका कहना था कि दीक्षान्त समारोह जीवन में अब तक हासिल की गई शिक्षा को समाज को समर्पित करके नए जीवन को आरंभ करने का अवसर है। रज्जू भय्या विश्वविद्यालय,प्रयागराज के दीक्षान्त समारोह में राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल जी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में सपना जरूर देखें । यह सपना ऐसा हो जिससे उनके जीवन में एक उमंग रहे।  विद्यार्थी अपने जीवन के लक्ष्य का निर्धारण कर उसे हासिल करने के लिए सतत प्रयास करें। जीवन में उत्साह बना रहना चाहिए तथा कभी भी हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। यह उत्साह ही योग्यता के संवर्धन में सहायक होता है। शिक्षकों में भी सीखने की ललक कम नहीं होनी चाहिए। एक अच्छे शिक्षक  का उसके छात्र जीवन भर अनुसरण करते हैं।

      समारोह में डा शर्मा ने कहा कि प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को प्रोत्साहन दिया गया है। प्रदेश में माध्यमिक में रिक्त संस्कृत शिक्षकों के पदो पर योग के शिक्षकों को उपलब्ध कराया गया है।  सरकार ने गुणवत्तापरक शिक्षा , नकलविहीन परीक्षा , सुखी मन शिक्षक और तनावमुक्त विद्यार्थी के संकल्प के साथ जो यात्रा आरंभ की थी ,उससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में क्रान्तिकारी बदलाव आया है।

       कोविड  प्रोटोकाल के अनुपालन की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि पहले भी यूपी ने कोरोना पर विजय प्राप्त की थी और आगे भी इस पर विजय मिलेगी। कोविड के दौर में भी शिक्षण व्यवस्था जारी है।  उन्होंने कहा कि पवित्रता पारदर्शिता स्पष्टवादिता निष्पक्षता और शैक्षिक अध्यापन में श्रेष्ठता के भाव  के साथ विश्वविद्यालय आगे बढे। डा शर्मा ने कहा कि कोविड काल में स़त्र नियमितीकरण के लिए आनलाइन शिक्षण की व्यवस्था आरंभ की गई । सरकार ने अनूठी पहल करते हुए डिजिटल लाइब्रेरी  की स्थापना कराई जिसमें 76000 से अधिक ई कंटेन्ट मौजूद हैं। राज्य सरकार की इस पहल को केन्द्र सरकार ने भी सराहा है।  डिजिटल लाइब्रेरी तथा आनलाइन सम्बद्धता प्रक्रिया के लिए यूपी को श्रेष्ठ कार्य करने वाले राज्य के रूप में CSI SIG eGovernance पुरस्कार की घोषणा संस्था द्वारा की गई है। कोरोना के नकारात्मक समय को सकारात्मक बनाने की दिशा में यूपी सरकार ने काफी काम किया है। सरकार प्रदेश के विश्वविद्यालयों में रोजगारपरक शिक्षा  एवं संस्कृत शिक्षा को बढावा दे रही है। यूपी की सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन और परिवर्धन की प्रक्रिया आरंभ की थी। आज उत्तर प्रदेश ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में अग्रता हासिल की है। इस सत्र से नए प्रकार से पाठ्यक्रम आरंभ हो रहे हैं। प्रदेश में शोध को प्रोत्साहन के लिए विश्वविद्यालयों में शोध पीठों की स्थापना कराई गई है। शोध को प्रोत्साहन के लिए पहली बार महाविद्यालयों के अध्यापकों को भी शोध/ पीएचडी आरंभ करने की अनुमति प्रदान की गई । इसके साथ ही एसोसिएट प्रोफेसर को प्रोफेसर पदनाम पर प्रमोशन  की व्यवस्था आरंभ की गई। 
     डॉ शर्मा ने कहा कि पिछले साढे चार साल में प्रदेश में 12 नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया पूर्णता की ओर है। उच्च शिक्षा के प्रसार की दिशा में यह अभूतपूर्व प्रगति है।

पूर्व में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने कोविड प्रोटोकाल के पालन के निर्देश दिए हैं। 15 वर्ष से 18 वर्ष के  बच्चों के वैक्सीनेशन की प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है। उत्तर प्रदेश में अधिकांश लोगों को  वैक्सीन की पहली डेाज लग चुकी है। कोरोना के लिए सभी तैयारियां पूरी हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा कराए गए विकास कार्यों के प्रति जनता में जबरदस्त उत्साह है। जन विश्वास यात्राओं में उमडी भीड से विपक्ष हताश और निराश है। विपक्ष अब दूसरे तीसरे और चैथे नम्बर पर आने  के लिए आपस में लड रहा है। विपक्षी दल भाजपा के साथ मुकाबले में आने के लिए आपस में होड कर रहे हैं। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसे कब कराया जाए इस पर अभी निर्णय होना बाकी है बाद में उप मुख्यमंत्री ने माघ मेले में ओम नमः शिवाय संस्था द्वारा आयोजित हजारों की संख्या में एकत्रित श्रद्धालुओं को संबोधित किया तथा भंडारे का शुभारंभ किया उसके बाद संगम तट पर जाके विधि विधान से माफ मिले स्थल के पास नदी तट पर पूजन अर्चन किया।

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