*मुलायम-मायावती की तारीफ सुन दंग रह गए सीएम योगी:योगी के मंच से वासुदेवानंद बोले- यूपी में संस्कृत और संस्कृति दोनों की दुर्दशा, मुलायम- मायावती ने संस्कृत की फिक्र की...आज पुस्तक लेकर नकल हो रही।
अन्य खबरे Sep 24, 2021 at 01:32 PM , 407गोरखपुर।
गोरखपुर में गुरुवार को महंत दिग्विजयनाथ जी की पुण्यतिथि में शामिल होने आए स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की बात सुनकर मंच पर बैठे योगी आदित्यनाथ सन्न रह गए। उन्होंने मंच से कहा कि यूपी में संस्कृत की क्या दशा है, मै न कहूं तो ही अच्छा है- 'मैं धन्यवाद दूंगा तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह को। जिन्होंने संस्कृत के विद्वानों को माध्यमिक का वेतन दिया। सारी सुविधाएं दी। ये स्केल उन्हीं का दिया हुआ है। मायावती जी ने भी प्राचीन पद्धति से नियुक्ति करने के आदेश दिए थे'।
वासुदेवानंद ने आगे कहा कि उनके समय परीक्षा में कलम गिर जाए तो नीचे झुककर उठा तक नहीं पाते थे, आज पुस्तक लेकर नकल की जा रही है- 'अध्यापक खुद पुस्तक फाड़कर देते हैं नकल करने के लिए। क्या कहा जाए? मैं प्रार्थना करूंगा अपने मुख्यमंत्री से, कि संस्कृत विद्यालयों में प्राचीन पद्धति से नियुक्तियां की जाए। साथ ही संस्कृत से आरक्षण समाप्त किया जाए। नियुक्तियां सरकारी नियंत्रण में की जाए, ताकि कोई पैसा लेकर नियुक्तियां न कर सके। ताकि संस्कृत और संस्कृति का उत्थान हो'। स्वामी वासुदेवानंद यहां गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 52वीं व ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 7वीं पुण्यतिथि पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतर्गत गुरुवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पुण्य स्मृति में श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे।
➡️नकल कराकर दी जा जा रही संस्कृत की डिग्रियां
➡️उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालयों में जब नकल कराकर डिग्रियां दी जा रही हैं, तो योग्य व्यक्ति मिलेगा कहां से? हमारे मुख्ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नकल पर रोक लगाने की कोशिश की, लेकिन अनेक बातें प्रचलित हुई और प्रसारित हुई, जिसे कहा नहीं जा सकता। कड़ाई हुई, कुछ सुधार तो हुआ, लेकिन आज भी नकल नहीं बंद हुई।गोरक्षा, संस्कृत व संस्कृति की रक्षा के लिए आगे आएं
➡️इसके बाद मंच पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी धार्मिक संस्थाओं से आह्वान किया है कि वे गोरक्षा, संस्कृत व संस्कृति की रक्षा के लिए आगे आएं। इसमें सरकार पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने भारत और भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए हर भारतीय को तैयार रहने का भी संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर धार्मिक पीठ संस्कृत विद्यालय खोले, सरकार इसमें हर संभव सहयोग करेगी।
➡️संस्कृत और संस्कृति को प्रोत्साहन हमारे आश्रमों को देना होगा। संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए योग्यता के आधार पर शिक्षकों का चयन करना होगा। अयोग्य व्यक्ति संस्था को नष्ट कर देगा। ऐसे में योग्य को तराशने की जिम्मेदारी धर्माचार्यों व आश्रमों को लेनी होगी। इससे संस्कृत, संस्कृति की रक्षा के साथ गोरक्षा भी होगी।
➡️गोरक्षा के लिए तीन व्यवस्थाओं पर काम कर रही सरकार
➡️मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षा के लिए सरकार तीन व्यवस्थाओं पर कार्य कर रही है। पहला निराश्रित गोवंश के लिए आश्रय स्थल बनाए गए हैं जहां वर्तमान में छह लाख गोवंश संरक्षित हैं। दूसरा सहभागिता योजना के तहत यदि कोई व्यक्ति आश्रय स्थलों से चार गोवंश लेकर उन्हें पालता है तो प्रति गोवंश के लिए सरकार उसे प्रतिमाह 900 रुपये देती है, जबकि गाय का दूध व अन्य सभी उत्पाद उसी व्यक्ति के हिस्से में आता है। तीसरी व्यवस्था कुपोषित महिलाओं व बच्चों के लिए की गई है। इसमें भी संबंधित परिवार को एक गाय व उसके पालन के लिए प्रतिमाह 900 रुपये दिए जा रहे हैं।



























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