स्वास्थ्य विभाग की तबादला एक्सप्रेस में बड़ी लापरवाही, मरे हुए डॉक्टरों का नाम भी शामिल

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लखनऊ।
स्वास्थ्य विभाग में बाबू के पद पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने कैसरबाग स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय पर स्थानांतरण के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन पर बैठे स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि हम ट्रांसफर नीति का विरोध कर रहे हैं। हमारे कई साथियों की बहुत दूर पोस्टिंग कर दी गयी है। हम लोग अभी कोरोना की दूसरी लहर से उभर भी नहीं पाए हैं कि हम लोगों का ट्रांसफर कर दिया है। 

*70 प्रतिशत लागू की गई ट्रांसफर नीति*

मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय पर धरने पर बैठी स्वास्थ्य कर्मी शशि गौतम ने बताया कि हमारे साथियों ने बीते दिनों आई कोरोना की दूसरी लहर को झेला है। साथ ही कईयों ने अपने प्रिय जनों को भी खो दिया है। इस सदमे से अभी हम लोग उभर भी नहीं पाए थे की ट्रांसफर नीति लागू कर दी गई। नियमों को ताक पर रखकर 70% ट्रांसफर नीति लागू कर दी गई। कई महिलाओं को दूर जिलों में भेज दिया गया है। हमारी मानसिक और शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं है कि हम इतने दूर जड़ों में जाकर नौकरी करें।

*मर चुके डॉक्टरों का भी तबादला सूची में नाम*

स्वास्थ्य विभाग में चली तबादला एक्सप्रेस में बड़ी लापरवाही सामने आई है। 2 साल पहले मर चुके डॉक्टर को भी तैनाती दे दी गयी है। वहीं दिवंगत डॉ बसंत कुमार मेहरोत्रा का भी ट्रांसफर कर दिया। 2 साल पहले बसंत मेहरोत्रा की मौत हो चुकी है। आजमगढ़ के तरवां में अस्पताल का सीएमएस बनाया। 

*1552 कर्मचारियों का तबादला*

बीते दो दिन पहले आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में 1552 कर्मचारियों और बाबुओं के तबादले हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। कोई नहीं जानता कब उसके तबादले की सूचना आ जाए। जानकारी के मुताबिक अब तक योगी सरकार ने प्रधान सहायक से प्रशासनिक अधिकारी, वरिष्ठ सहायक से प्रधान सहायक, कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक तथा चतुर्थ श्रेणी से कनिष्ठ सहायक पद पर पदोन्नत हुए 568 कर्मी एवं लिपिक संवर्ग के 984 कर्मचारियों के तबादले किए हैं।

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