SIET लखनऊ उ०प्र० द्वारा आयोजित द्वितीय आलेख लेखन ऑनलाइन कार्यशाला के तीसरे दिन का समापन
हेडलाइंस Jul 15, 2021 at 08:05 PM , 437लखनऊ। राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान, लखनऊ, उ०प्र० निदेशक ललिता प्रदीप एवं प्रशासनिक अधिकारी बिनोद सिंह एवं दिनेश जोशी के मार्गदर्शन में द्वितीय आलेख लेखन ऑनलाइन कार्यशाला के तीसरे दिन के समापन अवसर परबिनोद सिंह नें आज कमेंटेटर की तरह संचालन की शुरुआत की करते हुए प्रेरणादायक शब्दों से शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि....
हमें 602 प्रतिभागियों के फीडबैक प्राप्त हुए हैं। प्रतिभागियों के कमेंट और सुझाव हमारे लिए ऊर्जा का काम करते हैं।
(लघु फिल्म का प्रदर्शन)
गाना:
*दिल है छोटा सा छोटी सी आशा*
*नौनिहाल शिक्षा पायें पढ लिखकर तकदीर बनायें*
*बिनोद सिंह* ने प्रतिभागियों के फीडबैक पढ़कर सुनाये। एक प्रतिभागी की प्रशंसा करते हुए बताया
*मैं स्कूल से आया हूं और बारिश में पेड़ के नीचे खड़ा होकर कार्यक्रम सुन रहा हूँ*
अध्यापक के बारे में प्रशंसा करते हुए कहा कि....
*अध्यापक कुम्हार की तरह है जो एक बच्चे को किसी प्रकार के सांचे में ढाल सकता है,उसे आकार दे सकता है, उसका भविष्य बना सकता है।*
ललिता प्रदीप ने आज के मुख्य अतिथि सुधीर मिश्रा का स्वागत करते हुए उनका परिचय कराया कि जहां वे एक अच्छे पत्रकार हैं वहीं। इनकी रूचि साहित्य में भी है
बिनोद सिंह ने बताया कि हमने तीन दिन की कार्यशाला में तीन अलग-अलग विधाओं पर काम करना सिखाया है।
सुधीर मिश्रा की फिल्म *उम्मीद* का प्रदर्शन जो कि एक बीमार कमजोर बच्चे लालू की कहानी है कि किस प्रकार उसको एक उम्मीद के साथ ठीक किया और वह ठीक होने पर साईकिल चलाने लगा।
कविता: *ना उम्मीदी के छप्पर में उम्मीदों का तिनका*
सुधीर मिश्रा ने अभिवादन करते हुए आलेख मे कर्म पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया सिर्फ सूचना देना भर नहीं होता इसमें संवेदनशीलता और जुनून उसके बाद शब्द ज्ञान यानी भाषा पर अच्छी पकड़ हो तब आप किसी चीज को बेहतर तरीके से लिख सकते हैं और भाषा में संवेदना बहुत जरूरी है, उसे मानवीय पक्ष जरूरी है शॉकिंग एलिमेंट जरूरी है उन्होंने प्रिंट मीडिया के बारे में बताया कि खबर में 5 Wh का बड़ा खेल होता है कब, कहाँ, क्यों, कैसे, क्या कम से कम शब्दों में लिखें यानी ऊपर से नीचे तक समन्वय तारतम्य बना रहे हैं खबरों की प्रमाणिकता बहुत जरूरी है कि हम लिख सकते हैं वह इतिहास का हिस्सा होता है, जो लिख दिया हम उसको मिटा नहीं सकते, इसीलिए लिखने के लिए आपको पहले पढ़ना चाहिए।
ललिता प्रदीप ने सुधीर मिश्रा की प्रशंसा करते हुए कि आप की फिल्म उम्मीद मैंने देखा तो जब यह बच्चा अंत में साइकिल चलाने लगा तो मुझे बहुत खुशी महसूस हुई उन्होंने सभी को संबोधित करते हुए कहा स्क्रिप्ट के लिए पैशन डिवोशन और डेडीकेशन बहुत जरूरी है।
दिनेश जोशी जी को आमंत्रित करते हुए यह फिल्म कैमरे और एडिटिंग के बारे में, कोई तकनीक के बारे में विस्तार से समझाइए
दिनेश जोशी वीडियो स्क्रिप्ट की टेक्निक्स के लिए स्क्रिप्ट को हम कैसे फिल्मों मे बदलते हैं फिल्म विधाओं का समुच्चय है फिल्म के लिए एक आइडिया होना चाहिए ऐसे किसी को मकान बनाना हो तो उसके बारे में हम उसका डिजाइन ठीक है सभी के बारे में सोचते हैं।
फिल्म रोचक होनी चाहिए
■ *वीडियो प्रोग्राम हेतु आलेख लेखन*
●आलेख लेखन किसी प्रोग्राम का महत्वपूर्ण भाग है
●आलेख शुरुआत आधे की शुरुआत विचार आईडिया से होती है
●वीडियो प्रोग्राम आंखों के द्वारा देखे कानों के द्वारा सुने जाने वाला प्रोग्राम होता है
●वीडियो प्रोग्राम के लिए आलेख लेखक को विजुअल दृश्य तथा ऑडियो ध्वनि/संवादों की समझ आवश्यक है
●पटकथा लेखक को साहित्य की समझ आवश्यक है
●लेखक को कल्पनाशील होना चाहिए
●वीडियो माध्यम के लिए आलेख लेखन प्रिंट मीडिया से भिन्न है
●वीडियो प्रोग्राम में पटकथा को पढ़ने के लिए नहीं बल्कि देखने के लिए लिखा जाता है
■ *आलेख लेखन के मुख्य बिंदु* ●विषय- विषय ऐसा हो जो दर्शकों की उत्सुकता को बढ़ाये
●अच्छी शुरुआत हो
●प्रवचन से बचें- याद रखें कि आपके दर्शक बच्चे हैं जो जितना स्पष्ट हो उतना अच्छा है
●ध्यान आकर्षित करे
●गंभीर विषय पर बात करते समय आलेख में रुचि लाने के लिए चुटकुले, इफेक्ट,संगीत आदि का सहारा लें
जैसे टीवी सीरियल *मियां गुमसुम और बत्तो रानी* यानी संवाद के बजाये करके दिखाओ।
◆तथ्यों की जानकारी,उसकी सत्यता और प्रमाणिकता की जांच अवश्य करें
*लगान फिल्म के लिए आमिर खान आशुतोष गोवित्रिकर के पास आईडिया लेकर पहुंचे तो उन्होंने मना कर दिया लेकिन जब स्क्रिप्ट लिख कर लेकर गये तो तो एकदम तैयार हो गये*
■ *वीडियो कार्यक्रम की भाषा*
●इस भाषा में कलम के स्थान पर वीडियो कैमरे के द्वारा कहानी लिखनी होती है
●इसमें कैमरे के द्वारा अलग-अलग तरह के कैमरा सूट करके दिखाते हैं।(Camera Shoots, Camera Angle, Camera Movement, Camera Pan के बारे में बता कर सत्यजीत रे का उदाहरण दिया....
उन्होंने कहा था कि *फिल्म छवि है, फिल्म शब्द है, फिल्म गति है, फिल्म संगीत है, फिल्म स्किल है, मिनट का टुकड़ा ही इन सब बातों को दिखा सकता है*
*गेंद पानी में* जिसमें आर्केमिडीज का सिद्धांत दिखाया गये फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
★इस फिल्म को ऑल इंडिया फिल्म फेस्टिवल में अवार्ड प्राप्त हुआ था।
डॉ अभय कुमार ने निदेशक ललिता प्रदीप और बिनोद सिंह एवं सभी प्रतिभागियों का अभिवादन करते हुए कहा कि----
:टेक्नोलॉजी इज एक्सटेंशन ऑफ ह्यूमन बॉडी यानी शरीर की एक क्षमता है इससे आगे टेक्नोलॉजी
काम करती है। टेक्नोलॉजी हमारी एफिशिएंसी को बढ़ाती है
● *चैलेंज इन एजुकेशन सिस्टम*
1-Access
2-Quality
3-Equity
4-Affordability
5-Accountability
उपरोक्त पांच कारणों को आसान बनाने के लिए शिक्षा में टेक्नोलॉजी का प्रयोग होना चाहिए।
*Education Technology-Major Scheme and Initiatives*
1-समग्र शिक्षा-ICT Components
2-PM eVidya
3-ICT Initiatives
● *पीएम ई विद्या प्रोग्राम*
जिसमें दीक्षा का उदाहरण देते हुए वन नेशन वन पोर्टल मेंशन किया गया।
इस महामारी में जब बच्चों को पढाने को कोई साधन नहीं था भारत सरकार ने आत्मनिर्भर कार्यक्रम के अंतर्गत दीक्षा पोर्टल को लांच किया जिसके अंतर्गत 34 चैनल चलाये गये जिनमें से 12 चैनल एनसीईआरटी के पास है यानी हर कक्षा के लिए चैनल है।
स्कूल एजुकेशन में एनसीईआरटी को किशोर चैनल सहित कक्षा 1 से 12 तक के 12 चैनल दिये गये जो एनसीईआरटी सीआईईटी द्वारा संचालित होते हैं।
उन्होंने गुजरात की बाईजेक संस्था का उल्लेख किया जो गांधीनगर में पहले गुजरात सरकार के अंतर्गत कार्य करता था,अब भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी के अंतर्गत आता है।
● *क्यूआर कोड* स्केन करने पर यह टीवी और दीक्षा एप दोनों पर ही ले जाता है।
●प्रोसेसिंग इन डेवलपिंग ए ई-कंटेंट में ADDIE अर्थात Analysis, Design,Develop, Implement Evaluate के बारे में विस्तार से बताया।
●इंटरनेट चैनल भी शुरू किया
●कम्युनिटी रेडियो का भी सहयोग लिया
राकेश निगम जी ने शेर से शुरुआत किया..
*उम्र का बढ़ना तो दस्तूर है जहां है*
*ना मानो तो बुढ़ापा कहां है*
■ *Various Format of video program*
◆What is format
◆Elements of video program
◆Language of video program
◆Time
◆Kinds of format
◆Important consideration for
◆selection of format
डॉक्यूमेंट्री के जनक कौन ग्रेशन थे। उन्होंने कहा था कि डॉक्यूमेंट्री रोजमर्रा की जिंदगी में जो घट रहा है उन तथ्यों पर आधारित होती है यानी घटनाक्रम का वास्तविक प्रदर्शन किया जाता है। इसमें एक्शन पर कंट्रोल नहीं होता जबकि ड्रामे में हम बात को पात्रों के द्वारा कहते हैं। इसमें एक्शन पर कंट्रोल होता है।
ललिता प्रदीप ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया कि सभी लगातार इतने लंबे समय तक जुड़े रहे, अपना अमूल्य समय इन्वेस्ट किया। उसका लाभ आपको जरूर मिलेगा।
बिनोद सिंह द्वारा पूरी टेक्निकल टीम का परिचय देते हुए कार्यक्रम में सहयोग के लिए उनका धन्यवाद कर सभी का उत्साहवर्द्धन किया गया तथा सभी अतिथियों, विशेषज्ञों और सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया गया।
*पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है, पहले उसका विरोध होता है फिर उसको स्वीकार कर लिया जाता है*
★कार्यक्रम को सफल बनाने में अभय राज, IASE प्रयागराज से स्मिता जायसवाल, भदोही से ज्योति कुमारी, बस्ती से विमल आनंद, लखनऊ से सुरभि शर्मा, बस्ती से आलोक शुक्ला, भावना मिश्रा, अनुपम चौधरी, गाजियाबाद से वाणी शर्मा और कविता वर्मा,बागपत से मौ० यामीन ने टेक्निकल सहयोग प्रदान किया





























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