निवेश बढ़ाने के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला

जनपत की खबर , 399

लखनऊ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश सरकार कोरोना काल के दौरान भी निवेश को आकर्षित करने में सफल रही है। इसकी एक बड़ी वजह है कि राज्य में बिजनेस रेगुलेटरी कंप्लायंस से जुड़े प्रक्रिया में ढील दी गई है। इस वजह से उद्यमियों को इकाइयां स्थापित करने में ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ता है। समय से फाइलें सरकारी ऑफिसों से निपट आती हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने आदेश देते हुए कहा है कि राज्य सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को पूरी तरह से लागू करना चाहती है। 

ताकि औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। नागरिकों को बेहतर सुविधाएं दी जा सकें। इसलिए अनावश्यक कानूनों से संबंधित सभी विभागों की कार्य क्षमता बढ़ाई जाए। इनमें लंबित प्रकरणों का समाधान तलाशने के लिए डेडलाइन तय हो। उसके अंदर सभी मामले निस्तारित किए जाएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर ‘रिव्यु ऑफ मिनिमाइजिंग रेगुलेटरी कॉम्प्लायन्सेज़ बर्डेन’ का प्रजेंटेशन देखा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अनावश्यक कानूनों से सम्बन्धित सभी विभागों के लम्बित प्रकरणों के समाधान के लिए टाइम लाइन निर्धारित की जाए। समयबद्ध तरीके से इनका निस्तारण किया जाए। 

*औद्योगिक गतिविधियां बढेंगी*

सीएम ऑफिस इन प्रकरणों के समाधान के लिए विभिन्न विभागों की कार्यवाही की निरन्तर मॉनिटरिंग करेगा। उन्होंने मुख्य सचिव को इस कार्य की नियमित समीक्षा करने का आदेश दिया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, सरकार ‘ईज ऑफ डुईंग बिजनेस’ तथा ‘ईज ऑफ लिविंग’ को राज्य में पूरी तरह से लागू करना चाहती है। ताकि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को त्वरित गति से संचालित किया जा सके और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। प्रदेश के विकास में औद्योगिक गतिविधियों का विशेष योगदान है। इसके माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होता है, जिससे युवाओं को रोजगार मिलने की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं। 
*अनावश्यक कानूनों को हटाया जाए*

उन्होंने कहा कि इसको देखते हुए अनावश्यक कानूनों से सम्बन्धित सभी विभागों के लम्बित प्रकरणों का समाधान निर्धारित तिथि तक हर हाल में कर दिया जाए। जिन नियम-कानूनों को रिपील किया जाना है, उनके सम्बन्ध में तेजी से कार्यवाही करके इन्हें समाप्त किया जाए। प्रजेंटेशन देते हुए अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास अरविन्द कुमार ने अवगत कराया कि ‘मिनिमाइजिंग रेगुलेटरी कॉम्प्लायन्सेज़ बर्डेन’ पहल केन्द्र सरकार द्वारा सितम्बर, 2020 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य निर्धारित मापदण्डों पर ‘मिनिमाइजिंग रेगुलेटरी कॉम्प्लायन्सेज़ बर्डेन’ को कम करना था। 

*दो चरण में लागू होगी*
 
इस पहल से ‘ईज ऑफ डुईंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने सीएम योगी को बताया कि इस पहल के दो चरण हैं। पहला चरण 31 मार्च, 2021 में लागू हुआ। जबकि दूसरा चरण 15 अगस्त, 2021 से लागू होगा। इन दोनों चरणों के तहत 675 कॉम्प्लायन्सेज़ को चिन्हित किया गया। इन विभागों में श्रम, आबकारी, ऊर्जा, वन, रेरा, पर्यावरण, खाद्य एवं रसद, प्राथमिक शिक्षा, पंचायती राज, उच्च शिक्षा, हैण्डलूम तथा वस्त्रोद्योग, गृह, चिकित्सा शिक्षा, राजस्व, आवास, मत्स्य, सिंचाई तथा जल संसाधन, तकनीकी शिक्षा, परिवहन एवं नगरीय विकास शामिल हैं।

*वरिष्ठ अफसरों ने लिया हिस्सा*

इस बैठक में मुख्य सचिव आरके तिवारी, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव एमएसएमई एवं सूचना नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मनोज सिंह, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्रीमती मोनिका एस गर्ग, अपर मुख्य सचिव वाणिज्य कर एवं अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव नगर विकास डॉ रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव आवास श्री दीपक कुमार, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं सूचना संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव वन सुधीर गर्ग, प्रमुख सचिव परिवहन आरके सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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