भाजपा के के दो सांसद और दो विधायक नहीं भेद सके मुलायम का किला
जनपत की खबर Jun 27, 2021 at 09:50 PM , 225लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के दो सांसद और दो विधायक मिलकर भी मुलायम परिवार के किले के तौर पर मशहूर इटावा में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कब्जा करने में विफल रहें। जिले में इतने प्रभावशाली नेताओं की मौजूदगी के बावूजद भी भाजपा पंचायत चुनाव में केवल एक सीट में ही सिमट कर रह गई। यहां पर जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर मुलायम सिंह यादव के भतीजे अभिषेक यादव उर्फ अंशुल की जीत के बाद सपा खेमे में खुशी का माहौल हैं, वहीं सत्तारूढ़ दल में मायूसी देखी जा रही है। जीत से उत्साहित अभिषेक यादव कहते है कि उनकी जीत भाजपा की विफलताओं का परिणाम है। भाजपा नेता झूठ की राजनीति करते है। तभी तो पार्टी इस स्थिति मे आ गई है उसे केवल एक ही सीट पर संतोष करना पड़ रहा है। पंचायत चुनाव में भाजपा को मात्र एक सीट ही हासिल हुई थी। ऐसा कहा जाए कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की ओर से कोई प्रयास भी नहीं किया गया है।
दरअसल, भाजपा ने समाजवादी किले इटावा में 2017 के विधानसभा के चुनाव में सेंध लगाई थी, जब इटावा सदर सीट से सरिता भदौरिया और भरथना सुरक्षित विधानसभा सीट से सावित्री कठेरिया ने जीत हासिल की। 2019 के संसदीय चुनाव में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया भाजपा से सांसद निर्वाचित हो गए। इन तीन अति महत्वपूर्ण जीत के बाद भाजपा के प्रतिनिधि लगातार इस बात का दावा करते हुए देखे और सुने जाते रहे कि 1989 से इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर एक ही परिवार का कब्जा बरकरार है लेकिन अबकी बार भाजपा इस सीट पर अपना प्रतिनिधि काबिज कर देगी। वहीं, कभी लखनऊ से भाजपा का कोई मंत्री या बड़ा पदाधिकारी इटावा के दौरे पर आया तो वह भी हमेशा इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपाई प्रतिनिधि को काबिज करने का ही दावा करता था।
पिछले साल भाजपा ने महिला नेत्री गीता शाक्य को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया, तब एक सभा में भाजपा की जिला स्तर के तमाम छोटे-बड़े नेता हर किसी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर इस दफा भाजपाई जनप्रतिनिधि को काबिज करने का दावा किया। इस पर भाजपा जिलाध्यक्ष अजय धाकरे का कहना है कि उनकी पार्टी के पास जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए निर्धारित जनमत नहीं था इसलिए उनकी पार्टी की ओर से उम्मीदवार की घोषणा भी नही की जा सकी। पार्टी हार के कारणों की समीक्षा करने में लगी हुई है। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव से पहले भाजपा का हर छोटा-बड़ा नेता जिला पंचायत अध्यक्ष पद से मुलायम परिवार का कब्जा मुक्त कराने का दावा करता था।
इटावा से बीते साल गीता शाक्य को राज्यसभा सदस्य बनाने के बाद माना जा रहा था कि जिले में पिछड़ी जाति के मतों को भाजपा के पक्ष में लाने का प्रयास होगा। राज्यसभा सदस्य गीता ने भी इन वोटों को भाजपा के पक्ष में लाने की पहली प्राथमिकता जताई थी लेकिन जिला पंचायत चुनाव में इसका असर नहीं दिखा।































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