एबीवीपी जनजाति क्षेत्र की लड़कियों की नि:शुल्क पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालयों को देंगे ज्ञापन

जनपत की खबर , 329

लखनऊ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जनजाति क्षेत्र की लड़कियों की नि:शुल्क पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालयों को ज्ञापन देंगे। इसके लिए अवध विश्वविद्यालय को ज्ञापन दिया जा चुका हैं। साथ ही केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपकर सेना और सिविल की तैयारी कर रहे छात्रों को एक साल छूट दिए जाने की मांग की गई है और परिषद के कार्यकर्ता तीसरी लहर से बचाव के लिए जागरूक करेंगे और दाखिले में आनेवाली समस्याओं को दूर करने के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी करेंगे। इसकी जानकारी परिषद की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने शुक्रवार को पत्रकारवार्ता के दौरान दी। उन्होंने बताया कि अवध प्रांत जनजाति क्षेत्र का अध्ययन किया तो जानकारी मिली कि यहां पर छात्राएं स्नातक स्तर पर पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं। इसके लिए उन्होंने निर्णय लिया कि सभी विश्वविद्यालयों में ऐसी छात्राओं की पढ़ाई के लिए नि:शुल्क व्यवस्था विश्वविद्यालय की ओर से करने की मांग करेंगी। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों को ज्ञापन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि परिषद के सेवा कार्य चलाए जा रहे है। कोरोनकाल में कार्यकर्ताओं ने लोगों को आक्सीजन, बेड व दवाईयां उपलब्ध कराई है और मिशन आरोग्य के तहत गांव-गांव व बस्तियों में गए लोगों को जागरूक और वहां पर स्क्रीनिंग किया।
प्रदेश में अवध ग्राम संजीवनी के नाम चलाई गई योजना के तहत कार्यकर्ताओं ने 2270 गावं की स्क्रीनिंग की हैं, जिसमें 63203 लोग व 19805 परिवार शामिल हैं। इसको करने में 671 कार्यकर्ता व 138 टीम लगाई गई थी। साथ ही 6268 किट का वितरण किया गया। साथ ही कार्यकर्ताओं ने ऑनलाइन डाक्टरों का परामर्श भी उपलब्ध कराया। प्रतियोगी छात्रों को एक साल छूट की उठाई मांग निधि त्रिपाठी ने बताया कि कोरोना काल के चलते प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों का एक वर्ष खराब हुआ है चूंकि उनकी परीक्षा व उम्र की सीमा तय है इसलिए सेना व सिविल में नौकरी के आवेदन के लिए एक साल की छूट देने के लिए केंद्र सरकार को ज्ञापन दिया हैं। साथ ही स्नातक से ही छात्र बाहर विदेश पढ़ाई के लिए जा पाएं, इसके लिए केंद्रीय चिकित्सा मंत्री को ज्ञापन देकर 18 वर्ष की उम्र वाले छात्रों के लिए विशेष कैंप की व्यवस्था की मांग की है।
धर्मांतरण को लेकर किए गए सवाल पर राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा कि सोशल मीडिया सदुपयोग होना चाहिए न कि दुरूपयोग। छात्र का मन चंचल होता है और ऐसे में उन्हें कोई बरगला सकता है इसलिए जरूरी है कि छात्रों के प्रति अभिभावकों को सचेत रहना चाहिए। धर्मांतरण के लिए कड़े स्तर पर कदम उठाया जाएं। कार्यकर्ता छात्रों को जागरूक करेंगे।

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