Happy birthday : एक आम आदमी बस डीपो में चेकिंग क्लर्क बलराज बन गया बॉलीवुड का सुपरस्टार सुनील दत्त

हेडलाइंस , 851

लखनऊ।

बॉलीवुड जिस सुनील दत्त को जानता है उनका असली नाम बलराज दत्त था। कलाकार सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 में हुआ था। सुनील दत्त भारत-पाक विभाजन के वक्त करीब 17-18 साल के थे. हिंदू-मुस्लिम दंगे के दौरान एक्टर और उनके परिवार की जान खतरे में पड़ गई थी. उस समय उन्हें उनके पड़ोसी मुस्लिम परिवार ने मदद की और पनाह दी. पड़ोसियों ने सुनील दत्त और उनकी फैमिली को करीब एक महीने तक साथ रखा और इसके बाद परिवार को सही-सलामत हरियाणा पहुंचा दिया. इस इंसिडेंट ने दत्त साहब के दिल और दिमाग में गहरा असर छोड़ा था । कुछ समय बाद सुनील दत्त नें लखनऊ की ओर रुख किया और इसके बाद उनका परिवार मुंबई में पहुंचा। सुनील का असली नाम बलराज दत्त था। कॉलेज के दिनों में पढ़ाई करने के लिए वह लाइब्रेरी में जाकर बैठते थे। इसके साथ ही वह बस डिपो में भी काम किया करते थे। उनका समय दोपहर 2 बजे से रात को 11 बजे तक का काम होता था। यहां उन्हें चेकिंग क्लर्क का काम दिया गया था। इसके लिए उन्हें 100 रूपए महीना सैलरी मिलती थी। लेकिन सुनील दत्त की तकदीर में तो कुछ और ही लिखा था। हमेशा कॉलेज ड्रामा में हिस्सा लेने वाले सुनील का रेडियो अनाउंसर बनने का सफर भी काफी दिलचस्प था। उन्हें अपनी दमदार आवाज और स्पष्ट उचारण के कारण रेडियो पर बड़े-बड़े कलाकारों को इंटरव्यू लेने का मौका मिला। लेकिन यह तो उनके सफर की अभी शुरूआत ही थी। इसके बाद अब मौका था बलराज दत्त का सुनील दत्त बनना। सुनील दत्त फिल्म 'शहीद' के दौरान वह दिलीप कुमार का इंटरव्यू करने के लिए पहुंचे थे। इसके बाद फिल्म के डायरेक्टर रमेश सहगल ने उन्हें हीरो बनने के लिए कहा। बस फिर क्या था, सुनील दत्त ने भी तुरंत कह दिया कि अगर आप मुझे हीरो बनाएंगे तो जरूर बन जाऊंगा, लेकिन मैं छोटे-मोटे रोल नहीं करना चाहता। इसी घड़ी से इंडस्ट्री को सुनील दत्त मिल गए। सुनील दत्त ने अपने करियर में तमाम फिल्मों में लीड रोल प्ले करने के बाद भी डाकुओं के कई सारे रोल प्ले किए. इसी के साथ वे अपनी फिल्मों के जरिए डाकुओं की मनोदशा और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते नजर आए. करीब 10-12 फिल्मों में सुनील दत्त ने डाकू का रोल प्ले किया. उन्हें इस रोल में पसंद भी किया गया. दत्त सहाब  ने कुंदन, किस्मत का खेल, मदर इंडिया, हम हिंदुस्तानी, वक्त, छाया, मेरा साया, मिलन, हमराज, चिराग, हिमालय से ऊंचा, पड़ोसन, पापी, मुकाबला, लैला, वतन के रखवाले, फूल, परंपरा और मुन्नाभाई एमबीबीएस जैसी फिल्मों में नजर आए. बात दें कि अपने समय के शानदार एक्टर होने के साथ-साथ सुनील दत्त ने निर्माता व निर्देशक में भी हाथ आजमाया सिर्फ इतना ही नहीं भारतीय राजनीति में भी काफी सक्रिय रहें। 1984 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर मुंबई उत्तर पश्चिम लोक सभा सीट से चुनाव जीत कर सांसद बने। सुनील इसी क्षेत्र से लगातार 5 बार चुनाव जीते। मनमोहन सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री का हिस्सा रहें। भारत सरकार ने 1968 में उन्हें पद्म श्री सम्मान प्रदान किया गया। आज जिस पद्म श्री सम्मानित सुनील दत्त को पूरी दुनिया जानती है दरअसल उनका पहले बलराज दत्त था। आज उनके बर्थडे पर बताएंगे कैसे एक आम आदमी बलराज दत्त बॉलीवुड का सुपरस्टार सुनील दत्त बन गया।  25 मई, 2005 को बांद्रा में उनका निधन हो गया। अभिनेता सुनील दत्त ने अपने बेहतरीन किरदारों से दर्शकों के दिलों पर एक गहरी छाप छोड़ी है। आज भी वह अपनी फिल्मों के दम पर अपने चाहने वालों के दिलों में जिंदा हैं। 

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