सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर

हेडलाइंस , 636

नयी दिल्ली... 

सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है. इसमें महामारी के दौरान मीडियाकर्मियों की स्थिति पर प्रकाश डाला गया है. साथ ही पत्रकारों और उनके परिवारों को उचित कोरोना इलाज सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है.
डॉ कोटा नीलिमा की ओर से एडवोकेट लुबना नाज़ ने याचिका दायर की. इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की निदेशक डॉ कोटा नीलिमा ‘रेट द डिबेट’ की भी निदेशक हैं. आवेदन में बताया गया कि अप्रैल 2020 से अब तक 346 पत्रकारों की मौत हुई है. महामारी के दौरान बिना किसी मान्यता के काम कर रहे पत्रकारों के लिए चिकित्सा सुविधाओं और संस्थागत समर्थन की कमी है. पत्रकारों की 34% मौतें मेट्रो शहरों में हुई हैं जबकि 66% मौतें छोटे शहरों में हुई हैं. 54% मौतें प्रिंट मीडिया में हुई हैं और सबसे ज्यादा मौतें 41-50 साल के आयु वर्ग में हुई हैं.
याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पत्रकार कल्याण योजना (जेडब्ल्यूएस) के तहत विशेष अभियान के दिशानिर्देशों में एक पत्रकार के मान्यता विवरण की आवश्यकता होती है. मीडिया कर्मियों में प्रबंधकीय स्तर पर या पर्यवेक्षी रूप में कार्यरत व्यक्तियों को इसमें शामिल नहीं किया जाता. इससे बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी राहत से वंचित रहते हैं.
याचिका में कहा गया है कि एक ही मीडिया संगठन में काम करने वाले पत्रकारों में से एक मान्यता प्राप्त है और दूसरा गैर-मान्यता प्राप्त है. इनमें भेदभाव करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है.

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