शिक्षा मंत्री के भाई की नियुक्ति: EWS सर्टिफिकेट की जाँच की मांग

जनपत की खबर , 341

लखनऊ।
 

उत्तर प्रदेश सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल रहे डॉक्टर सतीश द्विवेदी व उनके भाई डॉक्टर अरुण द्विवेदी इस वक्त सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। दरअसल मंत्री के भाई  सिद्धार्थ विश्वविद्यालय बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति हुए हैं। मामला चर्चा में इसलिए है क्योंकी वो गरीब कोटे यानि EWS कोटे से नियुक्त हुए हैं। ये मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है साथ ही लोग नियुक्ति पर सवाल भी उठा रहे हैं।

इस बाबत सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे ने बताया कि मनोविज्ञान में लगभग डेढ़ सौ आवेदन आए थे। मेरिट के आधार पर 10 आवेदकों का चयन किया गया। इनमें अरुण कुमार पुत्र अयोध्या प्रसाद भी थे, इन्हीं 10 लोगों का इंटरव्यू हुआ तो अरुण दूसरे स्थान पर रहे वहीं इंटरव्यू एवं एकेडमिक तथा अन्य अंको को जोड़ने पर अरुण पहले स्थान पर आए। इस वजह से इनका चयन हुआ है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रशासन जारी करता है। शैक्षिक प्रमाण पत्र सही था, इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है। सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे जानकारी हुई कि वह मंत्री जी के भाई हैं। अगर ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र फर्जी हुआ तो वह निश्चित रूप से दंड के भागी हैं।
 
वहीीं अमिताभ ठाकुर तथा डॉ नूतन ठाकुर ने सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी कपिलवस्तु में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर पद पर नियुक्त किये गए शिक्षा मंत्री डॉ सतीश चन्द्र द्विवेदी के भाई डॉ अरुण कुमार उर्फ़ अरुण द्विवेदी द्वारा नियुक्ति हेतु प्रस्तुत ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट की जाँच की मांग की है. 

राज्यपाल तथा यूनिवर्सिटी की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल सहित अन्य को भेजे अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि डॉ अरुण कुमार शिक्षा मंत्री के भाई होने के साथ ही स्वयं भी बनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर थे. ऐसे में डॉ अरुण कुमार द्वारा ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट प्राप्त किया जाना प्रथमद्रष्टया जाँच का विषय दिखता है. 

 


"आप" पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा-

आदित्यनाथ जी के मंत्री सतीश द्विवेदी जी का कारनामा।
1621 शिक्षक चुनाव ड्यूटी में मर गये मंत्री जी को नही मालूम उन्होंने सिर्फ़ 3 बताया।
लेकिन अपने सगे भाई को EWS (ग़रीबी के कोटे ) में नौकरी कैसे देनी है ये मंत्री जी को मालूम है।
नौकरी के लिये लाठी खा रहे UP के युवाओं का घोर अपमान

उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ सुरेन्द्र दूबे ने भी कहा कि यदि ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट फर्जी होगा तो वे दंड के भागी होंगे. साथ ही शिक्षा मंत्री ने इस संबंध में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जो पूरे प्रकरण को अत्यधिक संदिग्ध बना देता है.
अतः अमिताभ तथा नूतन ने ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट की जाँच की मांग की है.

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