उत्तम स्वास्थ्य और ऑनलाइन शिक्षा ।

जनपत की खबर , 458

लखनऊ 21मई।
वर्तमान समय में देश कोरोना महामारी से जुझ रहा है।जिसका दूसरा  विकराल रूप लोगो की सांसो पर भारी पडा। विशेषज्ञों  की राय के अनुसार तीसरा रूप बच्चो के लिये घातक हो सकता है। 
प्राइवेट टीचर वेलफेयर  एसोसियशन उत्तर प्रदेश लखनऊ की ऑनलाइन मीटिंग मे इस विषय पर  शिक्षको की बैठक का आयोजन हुआ ।जिसमे अध्यक्ष देवेन्द्र कुमार सिंह 
उपाध्यक्ष विध्याचल पाठक ।संरक्षक शिशिर बाजपेई । की उपस्थिति मे लखनऊ सहित  प्रदेश से  3000 शिक्षक जुड़े  और सभी ने बच्चो की पढाई के लिये चिंता व्यक्त की ।अपने विचार रखते हुए अध्यक्ष जी ने कहा की हमारा संकल्प है की अधिक से अधिक अभिभावको को प्रेरित करे की वह बच्चो को  ऑनलाइन पढाये और इसके लिये  स्कूल मे प्रवेश जरूर कराए।क्योकी घर बैठा कर बच्चे पढ तो सकते है लेकिन जो पढने का सही तरीका है वह उनको नही पता।ऐसे मे सरकार सहित सभी नागरिको की जिम्मेदारी बनती है की बच्चो के स्वास्थ्य के साथ पढ़ायी पर  भी ध्यान दे ।
क्योकी कोरोना के कारण  स्कूल  पढने वाले बच्चे घर मे ही कैद होकर रह गये है । जो बच्चो के भविष्य के साथ सबसे बडा अन्याय  है। सरकार के साथ प्राइवेट स्कूल और कई प्राइवेट संस्थान उनको ऑनलाइन व्यस्त रखने के लिये  कुछ ना कुछ क्रियात्मक गतिविधिया कराते रह्ते है। जिसमे अभिभावको की महत्वपूर्ण भूमिका रही  है । जिसमे उनकी इच्छा अनुसार बच्चो ने कार्य किया या नही किया। और दोष दिया सरकारी तंत्र ।
कोरोना महामारी के कारण बच्चो की ऑनलाइन पढाई को मोबाइल ;टीवी के जरिये पढने के लिये सरकार ने बढावा दिया संसाधन उपलब्ध कराए जिससे अधिक से अधिक बच्चे पढ सके ।
लेकिन  अधिकांश इस तरह की  पढाई को  अभिभावको ने नकार दिया। कुछ ने मोबाइल लैपटॉप जैसे साधन ना होने के कारण तो कुछ ने पैसे की तंगी के कारण।
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है की चाहे शहरी हो या ग्रामीण क्षेत्र सभी के पास मोबाइल अवश्य है। ।जिसमे एंड्रॉइड सभी के पास ना हो यह अलग बात  है। लेकिन सभी के पास मोबाइल नही तो टीवी तो जरूर है । जिसके घर  टीवी नही था तो लोगो के द्वारा सामूहिक रूप से टीवी या मोबाइल के जरिये पढ़ाने के प्रयास किये गये।
धीरे धीरे स्थिति सामान्य होने लगी थी  सरकार ने भी स्कूल कॉलेज चरणबद्ध तरीके से खोलने प्रारंभ कर दीये थे।
जनसामान्य सरकारी निर्देशो की अनदेखी करके अपने कार्यो को करने लगा था ।
लेकिन कहावत है की सांप का फन कुचलने की कोशिश मे वह हर बार और भी घातक हो जाता है। ठीक वैसा ही हुआ।कोरोना ने अचानक से फिर अपना विकराल रूप दिखाया जो लोगो की सांसो पर भारी पडा।
जिसके कारण फिर से स्कूल कॉलेज बंद करने पड़े । क्योकी बच्चो का जीवन देश के भविष्य के लिये ज्यादा महत्वपूर्ण है। 
कोरोना महमारी के कारण जिन लोगो ने गतवर्ष अपने बच्चो को ऑनलाइन पढ़ने के  लिये प्रेरित नही किया या नही पढाया । उसमे से कुछ लोगो ने इस वर्ष स्वीकार करना  शुरु कर दिया है की बच्चो को ऑनलाइन ही पढाये । वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और 
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभी इस महामारी के बढ्ने की आशंका है ।जिसका प्रभाव बच्चो के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।जो  आशंका ही मात्र है। लेकिन यदि यह आशंका सत्य हो गयी तो कितना भारी पडेगा लोगो को।
बडे तो अपना जीवन जी चुके थे उनका जाना लोग सह भी गये।परंतु कौन अपने बच्चो का बुरा चाहेगा।।लेकिन यदि लोग नही सुधरे सरकारी नियमो को नही माना तो स्कूल कॉलेज लम्बे समय के लिये बंद हो जायेंगे ।जैसे हालात चल रहे है उसके कारण।स्कूल कॉलेज बंद ही रहे तो ही बेह्तर है ।लेकिन इसका यह मतलब नही की बच्चो को शिक्षा से वंचित रखा जाये ।इसलिए अभिभावको को जैसे अपनी लिये सैलरी के लिये ऑनलाइन कार्य करना ठीक लगता है।वैसे ही बच्चो को ऑनलाइन पढ़ाने के लिये भी मन से या बेमन से तैयार हो जाना चाहिये। 
  यदि वह ऐसा नही करते है तो ईसका सीधा प्रभाव बच्चो की शिक्षा पर और भविष्य पर  पडेगा।
क्योकी वर्तमान मे जो शिक्षा प्रणाली चल रही है ।उसमे बच्चो का  किसी ना किसी स्कूल मे प्रवेश जरुरी है ।यदि ऐसा नही करते तो बच्चो की उम्र तो बढ़ जायेगी लेकिन शिक्षा ठहर जायेगी ।
जिन  बच्चो ने गत वर्ष ऑनलाइन नही पढा उन बच्चो को इस वर्ष नया क्लास मिलने मे परेशानी होने लगी ।
अब फिर नही पढ़ायेंगे की यह विचार करके की अगले वर्ष दो क्लास आगे प्रवेश करा देंगे तो यह अभिभावको की बहुत बडी गलतफहमी है क्योकी ऐसा करने मे बच्चे का मष्तिष्क  तो उसी क्लास के साथ रुक गया जिस क्लास के साथ उसने छोडा था। ऐसी स्थिति मे कोई भी स्कूल बच्चे को नया क्लास नही  देगा। ऑनलाइन ना पढा कर अभिभावको ने   फ़ीस भले ही बचा ली हो लेकिन बच्चे के दिमाग को बढ्ने से रोक दिया है और उम्र बढ़ा दी है। ऐसे बच्चे  ऑनलाइन पढने वाले बच्चो से पिछड जायेंगे । जब वह देखेगे की उनका दोस्त तो मुझसे एक या दो क्लास आगे है मै अभी भी उसी क्लास मे हूँ तो ऑनलाइन पढाई ना करने वाले बच्चो मे हीनभावना आ सकती है। जो बच्चो के भविष्य के लिये अच्छा नही  होगा ।इसके लिये बच्चे परिस्थिति को नही सीधे तौर पर अभिभावको को ही दोष देंगे। इस विषय पर बच्चो के डॉक्टर सहित सभी बुद्धिजीवियो की यही राय है।बच्चो को उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिये   ऑनलाइन पढ़ायी ही कराई जाये।जब तक बच्चो का टीकाकरण पूरा ना हो जाये। इसके लिये स्चूलो के द्वारा और सरकारी तौर पर शिक्षा विभाग भी कार्य कर रहा है ।पिछ्ले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष ज्यादा अभिभावको के पास ऑनलाइन पढाई के साधन और विकल्प है।
सभी को इसका लाभ लेना चाहिये ।कोविड19  ने स्कूलों और कॉलेज के साथ प्राइवेट स्कूलो के शिक्षको के जीवन को भी बहुत प्रभावित किया है।लेकिन विषम परिस्थितियों के बावजूद  किसी भी शिक्षक ने ऑनलाइन पढ़ाने से मना नही किया ।इसके कारण शिक्षको का कार्य चार गुणा तक बढ़ गया है।
स्कूल कॉलेज बंद होने से बच्चो के प्रवेश भी नही हो पा रहे ।इसके लिये कई  प्राइवेट स्कूलो ने अभिभावको को फ़ीस मे  बहुत रियायत देने का प्रावधान किया है 
जो कोरोना काल के बाद मिलना नामुमकिन ही होगा। यह  समय है बच्चो के  बेहतर भविष्य के लिये बच्चो को  ऑनलाइन ही पढाये जब तक सब कुछ ठीक ना हो जाए।
समय विषम है लेकिन साध्य और साधन भी हमे ही उपलब्ध  कराना है। समय ,समझौता और सहयोग से हमे बच्चो की शिक्षा और  जीवन को संवारना है ।
अब समय है के बेहतर स्वास्थ्य  के साथ बच्चो की  शिक्षा और विकास पर भी ध्यान दिया जाना अति आवश्यक है।

ज्योती किरन रतन लखनऊ

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