यूपी में 71 हजार से अधिक बच्चे विशिष्ट अधिगम अक्षमता से प्रभावित, डिस्लेक्सिया की समयबद्ध पहचान के लिए शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण

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**लखनऊ।** उत्तर प्रदेश में डिस्लेक्सिया (विशिष्ट अधिगम अक्षमता) से प्रभावित बच्चों की प्रारंभिक पहचान और उन्हें बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में 30 अक्टूबर 2026 को राजधानी लखनऊ में राज्य स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए विशेष एवं सामान्य शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।
 
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों की समय रहते पहचान करना, उनकी विशेष शैक्षिक जरूरतों को समझना, दिव्यांगता प्रमाणन प्रक्रिया को सुगम बनाना और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना रहा।
 
**डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों की बौद्धिक क्षमता सामान्यतः अच्छी होती है: प्रो. हिमांशु शेखर झा**
 
कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के राज्य आयुक्त (दिव्यांगजन) प्रो. हिमांशु शेखर झा ने किया। उन्होंने कहा कि डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों की बौद्धिक क्षमता (IQ) सामान्यतः अच्छी होती है। डिस्लेक्सिया एक अदृश्य दिव्यांगता है, जिसके प्रति समाज में अभी भी पर्याप्त जागरूकता नहीं है।
 
उन्होंने कहा कि इन बच्चों की सीखने की अलग शैली और आवश्यकताओं को संवेदनशीलता के साथ समझने की जरूरत है। शिक्षक, अभिभावक और समाज के सभी वर्ग मिलकर प्रयास करें, ताकि ऐसे बच्चों को शिक्षा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
 
**विभागों के बीच समन्वय से मिलेगी बेहतर शैक्षिक सहायता**
 
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित राय ने कहा कि प्रदेश सरकार डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुगम दिव्यांगता प्रमाणपत्र और आवश्यक शैक्षिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।
 
उन्होंने बताया कि इस दिशा में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग और विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य किया जा रहा है।
 
**प्रदेश में 71 हजार बच्चे विशिष्ट अधिगम अक्षमता से प्रभावित**
 
प्रशिक्षण सत्र में चेंजइंक फाउंडेशन के कंसल्टेंट एवं डिस्लेक्सिया विशेषज्ञ अमरेश चंद्र ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने यू-डायस (UDISE) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक के लगभग 71 हजार बच्चे विशिष्ट अधिगम अक्षमता (SLD) से प्रभावित के रूप में चिह्नित किए गए हैं।
 
उन्होंने कहा कि इन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए व्यापक स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण, समयबद्ध स्क्रीनिंग, प्रारंभिक पहचान, उपचारात्मक शैक्षिक सहयोग और दिव्यांगता प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाना जरूरी है।
 
उन्होंने इस दिशा में स्वयंसेवी संस्थाओं, विशेष शिक्षकों, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया।
 
**शिक्षकों को बताए गए पहचान और शिक्षण के तरीके**
 
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए विशेष शिक्षकों और सामान्य शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को डिस्लेक्सिया के व्यावहारिक लक्षणों को समझने, कक्षा में प्रभावित बच्चों की पहचान करने और उनकी सीखने की गति एवं जरूरतों के अनुरूप शिक्षण पद्धतियां अपनाने की जानकारी दी गई।
 
कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि सीखने में कठिनाई का सामना कर रहे बच्चों को समय पर उचित शैक्षिक सहयोग मिल सके और उन्हें समान अवसर उपलब्ध हों।
 
**दीपक जायसवाल और संजय कुमार का रहा विशेष योगदान**
 
कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं संयोजन में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी दीपक जायसवाल एवं संजय कुमार का विशेष योगदान रहा।
 
विभाग की यह पहल प्रदेश में समावेशी शिक्षा को मजबूत करने और विशिष्ट अधिगम अक्षमता से प्रभावित बच्चों को बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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