**सीएम योगी ने लिखी ‘पाती’, कांवड़ यात्रा को बताया सामाजिक समरसता का महापर्व**

जनपत की खबर , 40

**लखनऊ।** मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ यात्रा को धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सेवा और एकता का महापर्व बताया है। कांवड़ियों के नाम लिखी अपनी ‘पाती’ में मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा सनातन संस्कृति के समभाव और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है, जो करोड़ों श्रद्धालुओं को शिवभक्ति के सूत्र में जोड़ती है।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि **भगवा वस्त्र, कंधे पर कांवड़ और हृदय में भोलेनाथ की भक्ति हर कांवड़िए की पहचान है।** पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के कदम अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी का लक्ष्य महादेव का जलाभिषेक करना है। उन्होंने कहा कि यात्रा में जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के भेद गौण हो जाते हैं।
 
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांवड़ यात्रा समाज और संस्कृति की जीवंत पाठशाला है। तप से चरित्र दमकता है, सेवा से समाज संवरता है और एकता से राष्ट्र निखरता है। उन्होंने दिव्यांग शिवभक्तों के समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका उत्साह और श्रद्धा मन को प्रभावित करती है।
 
### **कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध**
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कांवड़ियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यात्रा मार्गों पर **स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सुविधाओं और यातायात प्रबंधन** की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कांवड़ियों के स्वागत के लिए पुष्पवर्षा और यात्रा मार्गों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं। साथ ही सतत निगरानी के जरिए शिवभक्तों की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
 
उन्होंने लोगों से कांवड़ यात्रा को सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा का उत्सव बनाने की अपील की।
 
### **पर्यावरण-अनुकूल कांवड़ अपनाने की अपील**
 
मुख्यमंत्री ने कांवड़ियों से **पर्यावरण-अनुकूल कांवड़ अपनाने और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संकल्प लेने** की अपील की। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाए।
 
योगी ने कांवड़ियों से अपील की कि वे **एंबुलेंस और विद्यालय वाहनों को प्राथमिकता से रास्ता दें** और यात्रा के दौरान अनुशासन, संयम तथा सेवा की भावना बनाए रखें।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि **श्रद्धा, अनुशासन, संयम और सेवा ही कांवड़ यात्रा की आत्मा है।** भगवान शिव लोकमंगल के प्रतीक हैं और कांवड़ यात्रा उनके लोकमंगल के संदेश को समाज तक पहुंचाने का माध्यम है।

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