सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: APAAR ID बनवाना पूरी तरह वैकल्पिक, अभिभावकों की अनुमति के बिना स्कूल नहीं बना सकेंगे आईडी
अन्य खबरे Jul 20, 2026 at 05:45 PM , 96उपशीर्षक:
CBSE को पूरे देश में 'ऑप्ट-आउट' विकल्प लागू करने का निर्देश, परीक्षा के लिए आधार या APAAR ID अनिवार्य नहीं बनाई जा सकती।
संशोधित एवं संपादित खबर:
नई दिल्ली। देशभर के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) ID पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) है और किसी भी छात्र का APAAR ID अभिभावकों की स्पष्ट सहमति के बिना नहीं बनाया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को निर्देश दिया है कि वह उड़ीसा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के फैसले को पूरे देश में लागू करे। इसके तहत स्कूलों को सहमति पत्र (Consent Form) में अभिभावकों को 'ऑप्ट-आउट' (APAAR ID न बनवाने) का स्पष्ट विकल्प देना होगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने, प्रवेश लेने या शिक्षा प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड या APAAR ID बनवाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि CBSE के सभी नियम और दिशा-निर्देश डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023 के अनुरूप होने चाहिए।
यह मामला चार छात्रों के अभिभावकों की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि सरकार भले ही APAAR ID को वैकल्पिक बता रही है, लेकिन व्यवहार में स्कूलों के माध्यम से इसे लगभग अनिवार्य बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधार और APAAR ID के लिए बाध्य करना शिक्षा के संवैधानिक अधिकार और निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार ने उड़ीसा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी है, इसलिए उसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के तहत शुरू की गई APAAR ID योजना का उद्देश्य छात्रों का डिजिटल शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना, शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और प्रशासनिक सुधार लाना है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक पहल बताया, लेकिन स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में डेटा सुरक्षा कानून और अभिभावकों की सहमति से समझौता नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब देशभर के स्कूल APAAR ID के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बना सकेंगे और प्रत्येक अभिभावक को अपने बच्चे के लिए इस योजना से बाहर रहने (Opt-Out) का अधिकार मिलेगा।



























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