पद्मश्री योगेश जी अर्पित की गयी श्रधान्जली

जनपत की खबर , 436

लखनऊ 14 अप्रैल। पद्मश्री योगेश जी अर्पित की  गयी श्रधान्जली । "तुम्हारे दिल की चुभन भी ज़रुर कम होगी
किसी के पाँव का कांटा निकालकर देखो।"

यह पंक्तियाँ उस शख़्स की हैं,जिनकी छोटी सी काया में छुपी विशाल शख्सियत के आगे सभी नतमस्तक हैं, जिसके व्यक्तित्व की सरलता और सहजता का पूरा शहर क़ायल है और जिसके चले जाने से उन सभी की जो उन्हें थोड़ा भी जानते थे,आँखें नम हैं, बोल नहीं निकल रहे, बस निःशब्द हैं।
एक इतिहासकार, जो आज स्वयं इतिहास के पन्नो में समा गया है, पद्मश्री स्व. डॉ योगेश प्रवीन जी को आज संस्कार भारती की जानकीपुरम इकाई ने ऑनलाइन श्रद्धांजलि सभा मे याद किया एवं उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी गई। यह सभा गूगल मीट पर हुई थी ।
योगेश जी सदैव संस्कार भारती के कार्यक्रमो का हिस्सा रह्ते थे।यह पहला अवसर था जब आज उनके बिना उन्ही के लिये शोक सभा रखी गयी। आरती पांडे,अध्यक्ष, ने कहा की मुझे मेरे पुस्तक के विमोचन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मे शामिल हो कर अशिर्वाद दिया था और कहा था की पुस्तक के गीतो की कार्यशाला कराना।मै भी आऊंगा कार्यक्रम मे अब यह संभव नही होगा ।  देवेंद्र मोदी ,कोषाध्यक्ष, ने बताया की जब भी किसी कार्यक्रम मे धन की आवश्यकता हुई सबसे पहले उन्ही का हाथ आगे बढा।
यह भी बताया की वह कहते थे की मेरी बाते सभी सुनना चाहते हैं बुलाते है लेकिन मेरी पुस्तको को कोई नही खरीदता उनकी बातो मे लेखक का दर्द भी देखा मैने।
  मुक्ता चटर्जी, महामंत्री,  ने बताया की निशब्द हूँ  इतनी बाते है कुछ कह न्ही पा रही अश्रुपूरित नमन है। आशा श्रीवास्तव ,संरक्षक, ने बताया की सदैव उनका अशिर्वाद मिलता रहा है। परिवार से कोई चला गया है । रीताश्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, ने कहा की योगेश जी सदा अपनी रचनाओ के जरिये जीवित रहेंगे। ज्योति किरण रतन, ने कहा की शादी के पहले मै उनकी शिष्या थी शादी के बाद मै जब उनके घर मिलने गयी तो बहु के समान मुझे प्यार और दुलार दिया  ।मेरे बच्चो पर भी उनका अशिर्वाद सदा रहा है ।रीता पांडे, रेखा अग्रवाल, सुमन पांडे आदि ने डॉ योगेश प्रवीन के विषय मे अपने अपने उद्गार व्यक्त किये। वे अपने इस शेर की गई भाँति सबके पैरों के कांटे चुनने वालों में से एक थे।
ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें। ॐ शान्तिः

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