विश्व दूरसंचार दिवस 2026 : डिजिटल सुरक्षा, साइबर जागरूकता और सुदृढ़ नेटवर्क पर मंथन
राष्ट्रीय May 15, 2026 at 10:40 PM , 19 डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम, डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव और दूरसंचार कानूनों पर हुई विस्तृत चर्चा
लखनऊ। दूरसंचार विभाग, उत्तर प्रदेश (पूर्व) एलएसए द्वारा डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सहयोग से विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस–2026 के अवसर पर शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डिजिटल सुरक्षा, साइबर जागरूकता, दूरसंचार कानूनों तथा आपदा के समय निर्बाध संचार सेवाओं की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश (पूर्व) एलएसए के अपर महानिदेशक अरुण कुमार वर्मा, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अमर पाल सिंह, प्रो. मनीष सिंह, प्रो. अमनदीप सिंह, विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, छात्र-छात्राएं, दूरसंचार विभाग के अधिकारी तथा विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. मनीष सिंह ने अतिथियों के स्वागत के साथ की। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रही डिजिटल संचार व्यवस्था में तकनीकी और विधिक समन्वय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं कुलपति प्रो. (डॉ.) अमर पाल सिंह ने डिजिटल शासन व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी और सुरक्षित बनाने के लिए विधिक जागरूकता को आवश्यक बताया।
अपर महानिदेशक अरुण कुमार वर्मा ने बताया कि इस वर्ष विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस की थीम “डिजिटल जीवन रेखाएं : एक जुड़े हुए विश्व में सुदृढ़ प्रत्यास्थता” रखी गई है। उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग देश में सुरक्षित और मजबूत डिजिटल लाइफलाइन विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूरसंचार अधिनियम 2023 तथा मार्गाधिकार नियम 2024 दूरसंचार अवसंरचना के विस्तार और जनसुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि आपदा और आपात स्थितियों में नागरिकों तक त्वरित चेतावनी संदेश पहुंचाने के लिए सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम का परीक्षण किया गया है। इसके अलावा संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर के रिंग मोड नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके।
कार्यक्रम में दूरसंचार विभाग की जनहितकारी पहलों जैसे संचार साथी, वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक, तरंग संचार पोर्टल और दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने डिजिटल अरेस्ट, फर्जी क्रेडिट कार्ड कॉल, ट्रैफिक चालान स्कैम, नकली जॉब कॉल, पार्सल स्कैम, मोबाइल टावर स्कैम और लोन फ्रॉड जैसे साइबर अपराधों से सतर्क रहने की अपील की।
अधिकारियों ने बताया कि किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की शिकायत पर दर्ज की जा सकती है। वहीं साइबर धोखाधड़ी होने की स्थिति में पर शिकायत करने अथवा 1930 हेल्पलाइन पर तत्काल सूचना देने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम के दौरान दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के प्रतिनिधियों ने प्राकृतिक आपदाओं और आपात परिस्थितियों में निर्बाध संचार सेवाएं बनाए रखने के लिए मजबूत और लचीले दूरसंचार नेटवर्क की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
प्रो. अमनदीप सिंह ने दूरसंचार अधिनियम 2023 और दूरसंचार (राइट ऑफ वे) नियम 2024 के प्रमुख प्रावधानों, उनके प्रशासनिक और विधिक पहलुओं पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े विभिन्न समसामयिक विषयों पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।
छात्र अक्षत जायसवाल ने स्पेक्ट्रम आवंटन एवं नीलामी व्यवस्था, नमन अग्रवाल ने उभरती प्रौद्योगिकियों के नियामकीय ढांचे, शालिनी सिंह ने विधिसम्मत निगरानी प्रावधानों, सुयश त्रिपाठी ने दूरसंचार विकास निधि, आलोक सिंह ने शुल्क संरचना के युक्तिकरण, अंजुली पाण्डेय ने साझा दूरसंचार अवसंरचना तथा अभय प्रताप सिंह ने सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क निर्माण से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि डिजिटल युग में सुरक्षित, सशक्त और लचीली दूरसंचार व्यवस्था ही भविष्य के भारत की सबसे बड़ी आवश्यकता है।



























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