गोंडा में पीआईबी की ग्रामीण मीडिया कार्यशाला: ‘विकसित भारत’ संकल्प, नए विधेयक और जनकल्याणकारी योजनाओं पर व्यापक चर्चा
अन्य खबरे Feb 24, 2026 at 04:32 PM , 25गोंडा। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) लखनऊ द्वारा जिला पंचायत सभागार, गोंडा में ‘वार्तालाप कार्यक्रम’ (ग्रामीण मीडिया कार्यशाला) का आयोजन किया गया। कार्यशाला में हाल में संसद द्वारा पारित ‘विकसित भारत’ से जुड़े विधायी प्रावधानों, केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय पत्रकारों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि के रूप में गौरा विधानसभा के विधायक प्रभात कुमार वर्मा ने कहा कि ‘विकसित भारत’ से संबंधित नया विधेयक पुरानी व्यवस्थाओं की कमियों को दूर कर व्यापक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि यह पहल नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और प्रदेश से लेकर जिलों तक विकास की गति तेज हुई है।
विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम मिश्रा ने कहा कि ‘मन की बात’ जैसे संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार गरीब, किसान और मजदूर वर्ग के विकास पर निरंतर जोर दे रही है। उन्होंने मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि विकास संबंधी मुद्दों को प्रमुखता से उठाने से योजनाओं का लाभ आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।
कार्यशाला के संयोजक एवं पीआईबी तथा केंद्रीय संचार ब्यूरो, उत्तर प्रदेश के निदेशक दिलीप कुमार शुक्ल ने कहा कि गरीबों का कल्याण केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि नया विधेयक ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य करेगा।
पी.डी.एस. उपायुक्त (श्रम रोजगार) जनार्दन प्रसाद यादव ने कहा कि यह विधायी पहल रोजगार गारंटी का दायरा बढ़ाने, स्थानीय नियोजन को प्रोत्साहन देने, श्रमिक सुरक्षा और कृषि उत्पादकता में संतुलन स्थापित करने तथा योजनाओं के एकीकरण के माध्यम से ग्रामीण आजीविका में परिवर्तन लाने का लक्ष्य रखती है। उन्होंने इसे सामाजिक सुरक्षा तंत्र के सुदृढ़ीकरण की दिशा में कदम बताया।
वरिष्ठ पत्रकार जानकी शरण द्विवेदी ने बताया कि प्रस्तावित प्रावधानों के तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में पात्र ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी का लक्ष्य रखा गया है, जो पूर्व की 100 दिन की सीमा से अधिक है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के लागत साझाकरण, पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 तथा बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण के प्रावधानों की जानकारी दी।
इंडियन बैंक, आंचलिक कार्यालय गोंडा के उप आंचलिक प्रबंधक संदीप कुमार सिन्हा ने इंडियन बैंक की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं—प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना—की जानकारी देते हुए बताया कि इनका उद्देश्य वंचित और कमजोर वर्गों को किफायती बीमा एवं पेंशन सुरक्षा प्रदान करना है।
कार्यक्रम के अंत में संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पत्रकारों ने विभिन्न योजनाओं और विधायी प्रावधानों पर प्रश्न पूछे। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार की कार्यशालाएं ग्रामीण मीडिया को नीति संबंधी विषयों की गहन समझ प्रदान कर जनजागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगी।



























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