लखीमपुर खीरी में भव्य कलश शोभायात्रा के साथ पांच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ

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लखीमपुर खीरी। कलश में तेंतीस कोटि देवताओं का है।कलश में संपूर्ण ब्रह्मांड समाया हुआ हो। भारतीय संस्कृति में कलश का बड़ा महत्व है। वैदिक काल से ही शुभ अवसरों पर कलश स्थापना एवं पूजन का प्रचलन रहा है।कलश विश्व ब्रह्मांड का प्रतीक है। कलश में सभी देवशक्तियां निवास करती है। सभी में जल जैसी शीतलता एवं कलश जैसी पात्रता का विकास हो।कलश के मुख में विष्णु, कण्ठ स्थान में रुद्र, मूल स्थान में ब्रह्मा, मध्य स्थान में मातृका गण मध्य स्थान में सभी सागर सातों दीपो वाली धरती आदि सभी कलश में विद्यमान हैं। उक्त विचार हैं श्री वेदमाता गायत्री प्रचार समिति के संस्थापक अध्यक्ष यज्ञाचार्य पं राजेश दीक्षित जी के जिन्होंने नकहा खंड विकास के ग्राम रौली में श्री वेदमाता गायत्री प्रज्ञा पीठ के वार्षिक पांच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर भब्य कलश शोभायात्रा को संबोधित करते हुए कहे। उक्त अवसर पर भारी संख्या में माताओं, बहनों ने अपने सिर पर कलश रखकर मां शारदा नदी की नहर से पावन जल भरकर यज्ञशाला में विधिवत पूजन के साथ स्थापित किया शांति पाठ व प्रसाद वितरण के साथ कलश शोभायात्रा का समापन किया गया।29 मई को प्रातः देव पूजन के साथ पांच कुण्डीय यज्ञशाला में विधिवत आहुतियां दी जाएंगी।

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