ड्रेस कोड अभियान के समर्थन में पत्रकारों की ऐतिहासिक एकजुटता, विधान भवन के सामने दिखा अनुशासन और सम्मान का संदेश

राष्ट्रीय , 112

लखनऊ।
पत्रकारिता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल के रूप में उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति (पुनर्गठित) के संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रभात त्रिपाठी के आह्वान पर मंगलवार को विधान भवन के सामने पत्रकारों की अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली। यह आयोजन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की सामूहिक पहचान, गरिमा और एकता को सशक्त करने की दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर प्रभात त्रिपाठी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ड्रेस कोड अभियान किसी विचारधारा को थोपने का प्रयास नहीं, बल्कि पत्रकारों के बीच अनुशासन, सम्मान और सामाजिक पहचान को मजबूत करने की सकारात्मक पहल है। उन्होंने कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन आपसी कटुता, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और कटाक्ष पत्रकारिता की साख को कमजोर करते हैं। यदि चौथे स्तंभ को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना है, तो पहले हमें आपसी एकता और मर्यादा को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि विचारधाराएं भिन्न हो सकती हैं, मत अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हम सभी समाज के पढ़े-लिखे, जिम्मेदार और सच के पक्षधर कलम के सिपाही हैं। एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चाहे कोई उनसे सहमत हो या असहमत, यहां तक कि व्यक्तिगत आलोचना भी करे, वे जीवनपर्यंत पत्रकारों के अधिकार, सम्मान और हितों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
इस आह्वान का प्रभाव मौके पर स्पष्ट दिखाई दिया। लखनऊ के विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार विधान भवन के सामने एकत्र हुए और यह संदेश दिया कि पत्रकार समाज बिखरा हुआ नहीं है, बल्कि समय आने पर अपनी पहचान और गरिमा के लिए एकजुट होकर खड़ा हो सकता है। ड्रेस कोड में पहुंचे पत्रकारों ने यह साबित किया कि वे न केवल समाज का एक शिक्षित वर्ग हैं, बल्कि अनुशासन और संयम के साथ अपनी बात रखने में सक्षम भी हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रभात त्रिपाठी ने सभी पत्रकार साथियों से हाथ जोड़कर अपील की कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पत्रकारों की सामूहिक पहचान के लिए है। उन्होंने इसे पत्रकारिता की गरिमा स्थापित करने का एक महायज्ञ बताते हुए भविष्य के कार्यक्रमों में अधिक से अधिक सहभागिता का आह्वान किया। आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब कलम एकजुट होती है, तो उसकी ताकत पूरे समाज को दिशा देने की क्षमता रखती है।
कार्यक्रम के दौरान कई दर्जन पत्रकारों ने एक साथ फोटो खिंचवाई, वहीं प्रभात त्रिपाठी द्वारा ड्रेस का वितरण भी किया गया।
इस अवसर पर श्री विजय शंकर पंकज, भास्कर दुबे, शाश्वत तिवारी, अविनाश चंद्र शुक्ला, उमेश चंद्र मिश्रा, अजीत कुमार सिंह, रवि उपाध्याय, अजय वर्मा, आईना, सर्वजीत सिंह सूर्यवंशी, रूपेंद्र उपाध्याय, ज्ञानेश पाठक, विजय दुबे, नैमिष प्रताप सिंह, लखन लाल मिश्र (राष्ट्रीय संरक्षक, पत्रकार विकास काउंसिल), उमाकांत बाजपेई, विक्रम राव, संत प्रसाद शुक्ला, त्रिनाथ शर्मा, दीपक गुप्ता, अशोक चकलाधर, बलराम गुप्ता, सोनू भारती, जे.बी. सिंह, विवेक सिंह, गंगा प्रसाद दीक्षित, श्वेता सिंह, अर्चना गुप्ता, पृथ्वी पाल, परमजीत सिंह, सुभाष मिश्र, बबीता ओबेरॉय, हिमांशु भटनागर, विवेक कुमार राय, इकबाल, गुरमीत कौर, मनीष चित्रांश, विनय प्रकाश सिंह, कवलजीत सिंह, आलोक गुप्ता, संगीता शर्मा, राजकिशोर बारी, मनी तिवारी, प्रियंका गुप्ता सहित अनेक पत्रकार मौजूद रहे।

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