स्वच्छ ऊर्जा ही विकसित भारत की रीढ़, भारत बना पेरिस लक्ष्य समय से पहले हासिल करने वाला पहला G-20 देश: डॉ. पी. के. मिश्र

जनपत की खबर , 123

नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्र ने आज इंटीग्रेटेड रिसर्च एंड एक्शन फॉर डेवलपमेंट (IRADe) में आयोजित ‘सस्टेनेबल एनर्जी ट्रांज़िशन – ग्लोबल पर्सपेक्टिव’ विषयक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
डॉ. मिश्र ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा ‘विकसित भारत’ के विज़न का अभिन्न हिस्सा है और यह अब केवल एक सेक्टर तक सीमित विषय नहीं रह गया है, बल्कि विकास, प्रतिस्पर्धात्मकता, सामाजिक समावेशन और ऊर्जा सुरक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने पिछले वर्ष इंडिया एनर्जी वीक के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि “एक विकसित भारत का निर्माण स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास और सतत जीवनशैली पर आधारित होगा।”
डॉ. मिश्र ने 2014 के बाद भारत के ऊर्जा परिवर्तन से मिले दो अहम सबकों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी लक्ष्य तभी विश्वसनीय बनते हैं जब उन्हें मजबूत संस्थागत ढांचे, सतत वित्तीय प्रतिबद्धता और निरंतर क्रियान्वयन का समर्थन मिले। 2030 के बजाय 2025 तक 50 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में भारत की प्रगति और 100 गीगावाट सौर क्षमता का समय से पहले लक्ष्य पूरा करना इसी का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन तभी टिकाऊ होता है जब वह प्रत्यक्ष जनकल्याण से जुड़ा हो। पीएम-कुसुम योजना से किसानों को लाभ, पीएम सूर्य घर योजना से परिवारों को राहत और सौर विनिर्माण व इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के जरिए रोजगार सृजन इस बात को साबित करते हैं कि डीकार्बोनाइजेशन और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।
डॉ. मिश्र ने ऊर्जा सुरक्षा, किफायती आपूर्ति और सार्वभौमिक पहुंच को भारत की रणनीति का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के लिए ऊर्जा परिवर्तन न्यायसंगत, समावेशी और विकासोन्मुख होना चाहिए, जिसमें विभिन्न देशों की परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा जाए।
उन्होंने बताया कि भारत ने 2005 से 2020 के बीच अपनी जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में लगभग 36 प्रतिशत की कमी की है और वह अपने पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को तय समय से नौ वर्ष पहले पूरा करने वाला पहला G-20 देश बन गया है।
डॉ. मिश्र ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण से डीकार्बोनाइजेशन और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को मजबूती मिली है। राष्ट्रीय सौर मिशन, जैव ईंधन नीति, राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी जैसे सुधार भारत की दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों से आयात निर्भरता घटेगी और देश की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ेगी।
पीएम-कुसुम को पॉलिसी कन्वर्जेंस का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह ऊर्जा परिवर्तन, कृषि स्थिरता और ग्रामीण विकास को एक साथ आगे बढ़ाता है। वहीं, बायोफ्यूल कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है।
डॉ. मिश्र ने कहा कि भारत ने लगभग शत-प्रतिशत घरेलू विद्युतीकरण हासिल कर लिया है और 2024 में शुरू की गई पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से स्वच्छ ऊर्जा सीधे घरों तक पहुंच रही है। उजाला एलईडी कार्यक्रम और भवन दक्षता मानक भारत की लो-कार्बन विकास रणनीति की नींव हैं।
उन्होंने ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE)’ आंदोलन को व्यवहारिक परिवर्तन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। साथ ही, सौर पीवी मॉड्यूल के लिए पीएलआई योजना को घरेलू विनिर्माण में निर्णायक बदलाव का कारण बताया, जिसके चलते सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 120 गीगावाट तक पहुंच चुकी है।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का उल्लेख करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि भारत 112 सूर्य-समृद्ध देशों के साथ मिलकर ग्लोबल साउथ के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि जलवायु कार्रवाई की बुनियाद निष्पक्षता और जलवायु न्याय पर होनी चाहिए, जिसके लिए पर्याप्त और किफायती जलवायु वित्त व तकनीक हस्तांतरण आवश्यक है।
डॉ. मिश्र ने स्वीकार किया कि निकट भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयले की भूमिका बनी रहेगी, लेकिन भारत समानांतर रूप से उत्सर्जन तीव्रता में कमी, कोयला गैसीकरण और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं के विविधीकरण पर भी कार्य कर रहा है।

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