संविधान समष्टि के भाव से राष्ट्र को जोड़ने की प्रेरणा देता है: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
जनपत की खबर Jan 26, 2026 at 01:40 PM , 90लखनऊ, 26 जनवरी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को अपने सरकारी आवास पर ध्वजारोहण किया और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत का संविधान समष्टि के भाव के साथ राष्ट्र को जोड़ने की प्रेरणा देता है और ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। 76 वर्षों की इस यात्रा में संविधान ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन इसके बावजूद देश की एकता, अखंडता और नागरिकों के गौरव को निरंतर मजबूत किया। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक आज जिस नए भारत का दर्शन हो रहा है, उसमें संविधान की केंद्रीय भूमिका है।
सीएम योगी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को स्मरण करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन नई ऊंचाइयों तक पहुंचा। उन्होंने संविधान सभा के अध्यक्ष एवं देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित स्वतंत्रता संग्राम के सभी महान सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ और 26 नवंबर 1949 को संविधान अंगीकार किया गया। आज 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि संविधान की पंक्ति “हम भारत के लोग” प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणा है। संविधान का वास्तविक संरक्षक देश का नागरिक होता है और नागरिकों के प्रति सभी संस्थाओं, मंत्रालयों और विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करना संविधान के प्रति सच्चे समर्पण का प्रतीक है।
सीएम योगी ने कहा कि जब भी संविधान की मूल भावनाओं का अनादर होता है, तब यह उन महान बलिदानियों का भी अपमान होता है जिनके संघर्ष से देश स्वतंत्र हुआ। संविधान न्याय, समता और बंधुता के सिद्धांतों पर आधारित है। जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति से विकास की यात्रा प्रारंभ करनी होगी। यह केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि हर नागरिक की खुशहाली और आत्मनिर्भरता का मार्ग है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति स्वयं को संविधान, न्याय और व्यवस्था से ऊपर नहीं मान सकता। संविधान ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना का दस्तावेज है, जो देश के संकल्पों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। गणतंत्र दिवस संविधान के प्रति समर्पण भाव के साथ आगे बढ़ने और राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है।































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