केजीएमयू में हंगामा: महिला आयोग की उपाध्यक्ष को मुलाकात न मिलने पर बवाल, आरोपी डॉक्टर निष्कासित होगा

जनपत की खबर , 79

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में शुक्रवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब कथित लव जिहाद और यौन उत्पीड़न के मामले को लेकर पहुंचीं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को कुलपति से मिलने के लिए करीब 10 मिनट तक खड़ा रहना पड़ा। आरोप है कि इसके बाद भी उनकी कुलपति से मुलाकात नहीं हो सकी।
इससे नाराज अपर्णा यादव के समर्थकों ने प्रशासनिक भवन के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान कुछ संगठनों के लोग कुलपति कार्यालय के अंदर जाने का प्रयास करने लगे, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। हंगामे के चलते कुलपति कार्यालय में नुकसान की बात भी सामने आई है। वहीं, साक्षात्कार देने आए डॉक्टरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुलपति स्वयं डॉक्टरों के साक्षात्कार ले रही थीं।
घटना के बाद केजीएमयू के शिक्षक आक्रोशित हो गए और हंगामा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। शिक्षक संघ ने चेतावनी दी कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके. सिंह ने बताया कि शिक्षकों में काफी नाराजगी थी, हालांकि फिलहाल उन्हें शांत करा लिया गया है।
हंगामे के बाद कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में इस तरह की घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और तोड़फोड़ किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपर्णा यादव को मुलाकात के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने अकेले मिलने से इंकार कर दिया था।
इससे पहले अपर्णा यादव ने प्रशासनिक भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केजीएमयू प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में घटित संवेदनशील मामले की जानकारी समय रहते मुख्यमंत्री और राज्यपाल को नहीं दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला महिला उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा था, तो इसे लगभग 10 दिनों तक क्यों दबाकर रखा गया और पीड़िता को महिला आयोग तक पहुंचने से क्यों रोका गया। उन्होंने कहा कि महिला आयोग को जांच के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
इसी बीच केजीएमयू प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए शादी का झांसा देकर यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के दबाव के आरोपी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन नायक को निष्कासित करने का निर्णय लिया है। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि निष्कासन की संस्तुति चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजी जा रही है, जिसके बाद वह आगे की पढ़ाई नहीं कर पाएगा।
उन्होंने बताया कि मामला सामने आने के बाद आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर उसे दोषी पाया गया है। विश्वविद्यालय में इस प्रकरण की जांच दो कमेटियां कर रही थीं। यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच विशाखा कमेटी ने की, जबकि धर्मांतरण से जुड़े आरोपों की जांच सात सदस्यीय कमेटी ने की, जिसमें एक सेवानिवृत्त डीजीपी भी शामिल हैं। विशाखा कमेटी की रिपोर्ट में आरोपी को दोषी ठहराया गया है।
बताया गया कि पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज ने एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर को प्रेमजाल में फंसाया, शादी का झांसा दिया और बाद में धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर महिला डॉक्टर को धमकाया गया, जिससे मानसिक तनाव में आकर उसने नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।
घटना के बाद पीड़िता ने केजीएमयू प्रशासन, पुलिस, मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल और राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला उजागर हुआ और जांच शुरू की गई।

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