*महालेखा नियंत्रक (CGA), वित्त मंत्रालय, भारत सरकार एवं वित्त विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त रूप से लखनऊ में चौथा क्षेत्रीय सम्मेलन संपन्न*

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लखनऊ।

पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) पर आधारित चौथा क्षेत्रीय सम्मेलन आज लखनऊ में सफलता पूर्वक आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित हितधारकों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य डिजिटल वित्तीय शासन को सुदृढ़ करना और सार्वजनिक निधियों की निगरानी प्रणाली को और प्रभावी बनाना था।
इस अवसर पर श्री श्याम एस. दूबे, महालेखा नियंत्रक (CGA), भारत सरकार ने उद्घाटन संबोधन दिया। उन्होंने PFMS की पारदर्शिता, जवाबदेही और रियल-टाइम व्यय ट्रैकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। श्री दूबे ने वित्तीय प्रणालियों में राज्यों के बीच समन्वय, तकनीकी एकीकरण और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
श्री दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव (वित्त), उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागी राज्यों का स्वागत किया और PFMS के माध्यम से केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) एवं प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) में प्रभावी कोष प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु राज्य की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बजट सुधार और व्यय प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं को भी साझा किया।
यह सम्मेलन देश में इस प्रकार का चौथा सम्मेलन था। इसमें उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के वित्त विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन में SNA SPARSH प्रणाली, हाल ही में विकसित की गई उपयोगिताओं तथा विकासाधीन तकनीकी समाधानों पर विशेष चर्चा हुई।
SNA SPARSH केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) के लिए एक नवीन ऑनलाइन कोष प्रवाह प्रबंधन प्रणाली है, जिसकी क्रियान्वयन जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। यह प्रणाली “जस्ट-इन-टाइम” (Just-in-Time) के सिद्धांत पर कार्य करती है, जिसमें कोष तभी जारी किया जाता है जब भुगतान दावा प्रणाली में उत्पन्न होता है। इससे निधियों के जमा होने, पूर्व में जारी कोष के उपयोग में विलंब, एवं उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में देरी जैसी समस्याओं का समाधान हो गया है।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में PFMS की नई विशेषताओं, राज्य वित्तीय प्रणालियों के साथ एकीकरण, रीयल टाइम MIS और डैशबोर्ड उपयोगिताओं, तथा राज्य स्तर पर क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह क्षेत्रीय पहल केन्द्र एवं राज्यों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में एक कदम है, जिसका उद्देश्य सभी प्रशासनिक स्तरों पर प्रभावशीलता, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देना है।

सम्मेलन में तीनों राज्यों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विभिन्न मुद्दे उठाए, जिनका समाधान महालेखा नियंत्रक (CGA) एवं उनकी टीम द्वारा किया गया। श्री दूबे ने प्रतिभागी राज्यों द्वारा उठाए गए बिंदुओं की सराहना की और राज्य सरकारों द्वारा क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों का शीघ्र समाधान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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