*सियासत की भेंट चढ़ा बचपन: लखीमपुर खीरी में स्कूल ड्रेस में छात्राओं से कराया गया राजनीतिक प्रदर्शन, उठे सवाल*
अन्य खबरे Apr 23, 2026 at 07:15 PM , 24लखीमपुर खीरी।* शिक्षा के मंदिरों में अब किताबों की जगह राजनीतिक तख्तियां थमाई जा रही हैं। जिले से वायरल हुई एक तस्वीर ने शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक दलों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तस्वीर में स्कूल ड्रेस पहनी नन्हीं छात्राएं हाथों में राजनीतिक नारों वाली तख्तियां लेकर सड़क पर प्रदर्शन करती दिख रही हैं। स्कूल समय में बच्चों को राजनीतिक नारेबाजी के लिए सड़कों पर उतारने से हर कोई हैरान है।
*उठ रहे ये गंभीर सवाल*
*1. स्कूल प्रबंधन की भूमिका:* क्या स्कूल प्रशासन की अनुमति के बिना बच्चे यूनिफॉर्म में बाहर जा सकते हैं? यदि स्कूल की जानकारी में यह हुआ है तो यह शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता है।
*2. राजनीतिक दलों की मंशा:* क्या राजनीतिक दल अब अपना एजेंडा पूरा करने के लिए मासूम बच्चों का सहारा ले रहे हैं?
*3. अभिभावकों की चिंता:* माता-पिता बच्चों को स्कूल भविष्य बनाने भेजते हैं, न कि किसी पार्टी का पोस्टर थामकर सड़कों पर नारे लगाने।
*नियमों का उल्लंघन*
नियमों के अनुसार शैक्षिक संस्थानों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। बच्चों का मन कोमल होता है। उन्हें राजनीतिक विवादों में झोंकना उनकी मानसिक स्थिति और भविष्य पर गलत असर डालता है। यह घटना न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि उन लोगों की मानसिकता भी उजागर करती है जो निजी लाभ के लिए शिक्षा के पवित्र आंगन को राजनीतिक अखाड़ा बना रहे हैं।
*जिम्मेदार कौन?*
इस प्रदर्शन के पीछे कौन है? क्या जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग संज्ञान लेगा? यह सवाल हर नागरिक के मन में है। बच्चों को पढ़ाना और बेहतर भविष्य देना जिम्मेदारी है, उन्हें राजनीतिक मोहरा बनाना नहीं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच करे और सुनिश्चित करे कि भविष्य में किसी भी बच्चे को शिक्षा के समय राजनीतिक गतिविधियों में शामिल न किया जाए।



























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