रहमानखेड़ा में बाघ की घेराबंदी में मुश्किलें

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लखनऊ: 

लखनऊ के रहमानखेड़ा में बाघ की घेराबंदी नहीं हो पा रही है। बाघ के पैरों के निशान मिले हैं, लेकिन वन विभाग उसे पकड़ने में सफल नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञों की कमी के कारण घेराबंदी में मुश्किलें आ रही हैं। अब तक बाघ ने वन विभाग की टीम को 9 बार चकमा दिया है, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। शाम 6 बजे के बाद लोग अपने घरों में कैद हो जा रहे हैं।

लखनऊ के रहमान खेड़ा के जंगल और आसपास के करीब 15 किमी के दायरे में बाघ से कई गांवो में दहशत का माहौल है। बाघ के खौफ से लोगो ने अपने घर ने निकलना बंद कर किया है। शाम होते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं।

बाघ के डर से न तो किसान खेतों में उगाई सब्जियां बेचने मंडी जा पा रहे है और न ही व्यापारी दुकानें खोल रहे और बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। बाघ की दहशत से सबसे अधिक मीठे नगर और बुधड़िया गांव है। इन गांवों में बाघ ने जानवरों का शिकार किया है। जहां के किसानों और फसलों पर इसका बहुत असर पड़ रहा है।मीठे नगर के रहने वाले किसान अयोघ्या प्रसाद ने बताया कि खेतों में मचान बनाकर फसल की रखवाली करते थे लेकिन बाघ की आहट के बाद से मचाने खाली हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीते रविवार को कानपुर, लखनऊ और लखीमपुर खीरी से बुलाई गई टीम ने बाघ को पकड़ने की कोशिश की पर सफलता न मिली। बाघ पकड़ने के लिए एक पिंजरा लगाया था, जिसमें भैंस के बच्चे को पिंजरे में रखा गया था कि बाघ लालच में आकर उसका शिकार करेगा और पिंजरे में फंस जाएग।. लेकिन बाघ पिंजरे में नहीं आया। इस बीच, भैंस के बच्चे का पिंजरे में दम जरूर घुट गया और उसकी मौत हो गई। हालांकि, इससे पहले बाघ ने पिंजरे में आकर एक पड़वे का शिकार किया था।

बीते शुक्रवार रात बाघ ने एक गाय पर हमला करके उसका शिकार कर लिया और बाघ पकड़ने वाली विशेषज्ञों की टीम सिर्फ देखती रह गई। बाघ वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि, राहत की बात है कि बाघ ने अब तक किसी आदमी पर हमला नहीं किया है।

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