*यूपी : पूर्व सांसद धनजंय सिंह ने इलाहाबाद कोर्ट में किया सरेंडर, भेजे गए नैनी सेंट्रल जेल*

जनपत की खबर , 285

लखनऊ।
अजीत सिंह हत्याकांड के आरोपी जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने शुक्रवार सुबह प्रयागराज के एमपी एमएलए कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। गौरतलब है कि राजधानी में अजीत सिंह हत्याकांड में फरार जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर कमिश्नरेट पुलिस ने 25 हजार का ईनाम घोषित किया था। बृहस्पतिवार को डीसीपी पूर्वी संजीव सुमन ने बताया था कि पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की हत्या के मामले में पूर्व सांसद साजिश करने के आरोपी हैं। बताया जा रहा है कि लखनऊ पुलिस प्रयागराज रवाना हो गई है, जहां इसे रिमांड पर लेने की बात कही जा रही है। वहीं 2017 में खुटहन में हुए एक मामले में पूर्व सांसद ने जमानत तुड़वा कर सरेंडर किया है। 14 न्यायिक अभिरक्षा में नैनी सेंट्रल जेल भेजे गए। एक अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई होगी।


डीसीपी पूर्वी संजीव सुमन के मुताबिक, अजीत हत्याकांड में पूर्व सांसद के खिलाफ कोर्ट से गैरजमानती वारंट हासिल करने के बाद तलाश तेज कर दी थी। बुधवार रात को पुलिस ने लखनऊ में उनके चार ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन पूर्व सांसद नहीं मिले। पुलिस ने इन ठिकानों से तीन लोगों को हिरासत में ले लिया था। पूछताछ के बाद इन्हें छोड़ दिया गया था।


पूर्व सांसद के पिता और रारी के पूर्व विधायक राजदेव सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बेटे के सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्हें आशंका है कि पुलिस की लगातार विधि विरुद्ध कार्रवाई से बेटे की जान को खतरा है।  

पूर्व विधायक राजदेव सिंह ने शहर के कालीकुत्ती स्थित आवास पर पत्रकारों से कहा कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह को गलत तरीके से मुकदमों में वांछित दिखाकर जनता में छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। उन पर अवैध संपत्ति अर्जित करने की अर्नगल बातें की जा रही हैं। 

जिस मुकदमे में आरोपी गिरधारी के बयान के आधार पर पूर्व सांसद की संलिप्तता जाहिर की जा रही है, वह बयान पुलिस ने लिया है। पुलिस की ओर से लिया गया बयान साक्ष्य में ग्रहण योग्य नहीं होता। उन्होंने कहा कि धनंजय सिंह ने अक्तूबर 2020 में हुए मल्हनी विधानसभा के उपचुनाव में अपनी संपूर्ण संपत्तियों का विवरण दिया है। यह समाचार पत्रों में प्रकाशित भी हुआ था। 

धनंजय सिंह के पास चुनाव में घोषित संपत्ति के अतिरिक्त अन्य कोई भी संपत्ति नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हमारी मांग है कि पुलिस की विधि विरुद्ध कार्रवाई और दुष्प्रचार पर रोक लगाएं। अनावश्यक रूप से छवि धूमिल करने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए

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