पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वाली स्कंदमाता

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पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वाली स्कंदमाता की पूजा-अर्चना, नवरात्रि में पांचवें दिन की जाती है कहते हैं कि माँ स्कंदमाता की कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाते हैं स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ की माता होने के कारण, इन्हें, स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है इनके विग्रह में भगवान स्कंद, बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं आइए जानते हैं माँ स्कंदमाता के सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी
माँ स्कंदमाता का महत्व हिन्दू धार्मिक शास्त्रों में माँ स्कंदमाता का अत्यधिक महत्व बताया गया है मान्यताओं के अनुसार, माँ स्कंदमाता की उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी होती हैं, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, निसंतान को संतान सुख की प्राप्ति होती है और साथ ही भक्त को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण, इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय होता है माँ स्कंदमाता का स्वरूप हिन्दू धार्मिक पुराणों के अनुसार, माँ स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं, जिनमें से माता ने अपने दो हाथों में कमल का फूल पकड़ा हुआ है उनकी एक भुजा ऊपर की ओर उठी हुई है, जिससे वे, भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और एक हाथ से उन्होंने, गोद में बैठे अपने पुत्र स्कंद को पकड़ा हुआ है माँ स्कंदमाता, कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसीलिए उन्हें, पद्मासना भी कहा जाता है स्नेह की देवी हैं स्कंदमाता
हिन्दू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, माँ स्कंदमाता को स्नेह और ममता की देवी माना जाता है मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि माता को अपने पुत्र स्कंद और भक्तों से अत्यधिक प्रेम है जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ता है तो माता अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का नाश करने के लिए आती हैं हिन्दू धार्मिक पुराणों में माँ स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए जो मंत्र बताए गए हैं, वो इस प्रकार हैं....पहला मंत्र:
सिंहासनागता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया |
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ||
दूसरा मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता | 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||
भक्तों के लिए नवरात्रि, माँ स्कंदमाता को प्रसन्न करने का एक सुनहरा अवसर माना जाता है, जिससे भक्त, बिलकुल भी नहीं चूकते वे, पूर्ण श्रद्धा और पूरे विधि-विधान के साथ माँ स्कंदमाता की आराधना करते हैं और माँ भी अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देती हैं।

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