*इन्जीनियर से साहित्य्कार बन डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित प्रमोद पांडेय का साहित्यिक सफरनामा*

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  दिल्ली:- इंजीनियर प्रमोद पाण्डेय के आराध्य भगवान श्री कृष्ण जी व जगत्जननी माँ श्री राधा जी हैं। प्रमोद कुमार पाण्डेय वर्तमान में लखनऊ विकास प्राधिकरण में अवर अभियंता के पद पर कार्यरत हैं, जो भगवान श्री राम की पावन नगरी श्री अयोध्या के निवासी हैं। जो साहित्य से अनभिज्ञ थे वे कहते हैं:- "मैं विज्ञान और इन्जीनियरिंग का छात्र रहा हूँ, मुझे हिन्दी साहित्य का क ख ग भी नहीं आता था।   आज से करीब चार वर्ष पूर्व परम आदरणीय बड़े भाई  डा. अनिल कुमार पाठक (आइ ए एस ) तत्कालीन जिलाधिकारी अयोध्या की एक पुस्तक का विमोचन तत्कालीन राज्यपाल महामहिम श्री राम नाइक के करकमलों से हुआ। बस यहीं से मेरा साहित्यिक सफर शुरू हुआ" डा. अनिल कुमार पाठक जी को पांडेय जी प्रेरक मानते हैं। उनके कारण ही उनकी रुचि  साहित्य में बढ़ी बाद में वे सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए।  फेसबुक पर उनका जुड़ाव हिन्दी साहित्य की संस्था साहित्य संगम संस्थान दिल्ली से हुआ जहाँ पर उनकी मुलाकात  संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री राजवीर सिंह मंत्र जी से  हुई। आदरणीय मंत्र जी का परम पावन स्नेह पाकर  वे हिन्दी साहित्य में अपनी रुचि और जानकारी दोनों बढ़ाते गए।   आदरणीय गुरुदेव मधुब्रत जी के पावन निर्देशन में छंदशाला के माध्यम से वे छंदाधारित रचनाएं लिखने लगे। इस साहित्यिक उपलब्धि का श्रेय वे आदरणीय श्री मंत्र जी, आदरणीय गुरुदेव श्री मधुब्रत जी, आदरणीय भाई डा. अनिल कुमार पाठक जी समेत सभी साहित्यिक गुरुओं को देते हैं।
  साहित्य संगम संस्थान ने उनके सुदीर्घ साहित्यिक सेवाओं व श्रेष्ठ साहित्य सृजन शोध कार्यों व हिंदी सेवक के रूप में उल्लेखनीय योगदान हेतु 25 दिसम्बर रविवार को  विद्यावाचस्पति मानद उपाधि से सम्मानित करने की घोषणा की है। साहित्य संगम संस्थान के आगामी लखनऊ अधिवेशन/कवि सम्मेलन में पाण्डेय साहब को उपाधि से विभूषित किया जाएगा।

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