फरिश्ता बन कर सभी की मनवाई धूमधाम से दिवाली

जनपत की खबर , 461

*बेसहारो का सहारा बना हनुमंत तिवारी*

*० अनाथ और बेसरा परिवारों के चेहरे पर लाई खुश* 

*० फरिश्ता बन कर सभी की मनवाई धूमधाम से दिवाली*


लखनऊ :- उत्तर प्रदेश और नेपाल से सटे सीमा क्षेत्र जिला लखीमपुर खीरी के  नीमगांव में कई ऐसा परिवार था जो दीपावली नहीं मना पा रहा था जहा किसी के पिता नहीं तो किसी का पति नहीं और न जाने कितने बच्चों और लड़कियों का तो कोई भी नहीं था लेकिन वहीं एक ये लाइन बहुत भरोसेमंद है  जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो ..खुदा या ईश्वर कई रूप में फरिश्ते बन कर आते है जी है और इन परिवारों के बीच ये फरिश्ता बन कर इन बेसहारा परिवारों के बीच दीवाली धूमधाम से मनाई ! लखीमपुर के थाना नीमगांव क्षेत्र के चौकी इंचार्ज हनुमंत तिवारी ने इस बार क्षेत्र के कई बेसहारा परिवारों की दिवाली धूमधाम से  मनाई जहां वह अपनी तनख्वाह के पैसों  से बच्चों बुजुर्गों महिलाओं और अनाथ बछियों के लिए कपड़े, खिलौने, मिठाई , दीपक ,मोमबत्ती और पटके आदि सामान लेकर उनके घर पहुंचे जहां उन सभी परिवारों के चेहरे पर रौनक आ गई उन्हें लगा कि वाकई त्यौहार हम भी मना सकते हैं ऊपर वाले ने ये मौका देदिया जहाँ ये मंजर वाकई हम वहाँ अपनी आंखों से भले ही न देख पाएं हो लेकिन महसूस किया जासकता है कि उन परिवारों को  कितनी खुशियां दीं होगी हनुमंत तिवारी ने ये देख कर उस गांव के सभी के आंखों में ख़ुशी के आशु अगाएँ वैसे ही हम आप को सोच कर भी आंखों में ख़ुशी के आशु आगये की  काश हुमुमन्त तिवारी जैसे सभी बन जएँ तो किसी की दीवाली ईद अधूरी नही होगी! 

वही हनुमंत तिवारी ने गांव के दलित बस्ती में भी जाकर  गरीब महिलाओं बच्चों के साथ भी ऐसे ही मिलकर अपनी  दीवाली मनाई  जहाँ सिकंदराबाद कस्बे में एक ऐसा परिवार था जिसका परिवार का मुखिया कुछ महीने पहले करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई थी जिसकी परिवार में चार लड़कियां और एक लड़का था जिसकी दिवाली इस बार पिता के मरने के चलते अधूरी थी मायूस थे सभी लेकिन जहां फरिश्ता बनके पहुंचे नीमगांव की चौकी इंचार्ज हनुमंत तिवारी और उन सभी बच्चों के चेहरों पर खुशियां ल दी और उनसभी की दीवाली धूमधाम से मनवाई

आप को बताते चलें कि हनुमंत तिवारी के लिए ये कोई नई बात नहीं है  हनुमंत तिवारी जिस चौकी में प्रभारी रहते है उस क्षेत्र में यदि आये परिवार है तो उस परिवार के बीच पहुँच कर  धूमधाम से त्यौहार मनाते नजर आए हैं सबसे बड़ी बात यह रही है कि अपनी मेहनत की कमाई की तनख्वाह से इन सभी परिवारों के चेहरे पर खुशी लाने की कोशिश करते है और वो परिवार के दिलों से निकली दुवा हनुमन तिवारी के परिवार तक भी पहुंचती है जिसमे हनुमंत तिवारी और उनका परिवार भी खुश रहता है ये जरूर कहा जा सकता है कि काश अगर ऐसे ही कई चौकी इंचार्ज और ज़िमेदार अधिकारी और इंसान हनुमंत तिवारी की तरह बन जाए तो कोई आएसा परिवार  दिवाली और ईद में मायूस नहीं होगा !

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