पहले तबादला अब कार्यभार में किरकिरी करा रहा परिवहन महकमा

अन्य खबरे , 373

सवालों के घेरे में 77 में से महज 29 डीबीए के स्थानांतरण का आदेश

स्थानांतरण के माह भर बाद भी अधिकांश ने नहीं किया कार्यभार ग्रहण

लखनऊ। प्रदेश का परिवहन महकमा डीबीए (डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर) के तबादला और कार्यभार ग्रहण में खूब किरकिरी करा रहा है। प्रमुख सचिव परिवहन की कडाई के बाद जहां 77 में से केवल 29 डीबीए का स्थानांतरण किया गया। तो वही अब स्थान तो पाने वालों की कार्यभार ग्रहण को लेकर जोर आजमाइश की जा रही है। आलम यह है कि तबादला आदेश के माह भर बाद भी अधिकांश डीबीए कार्यभार ग्रहण नहीं किए हैं।
सनद हो कि परिवहन महकमे के संभागीय व सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में कोई डीबीए 20 वर्षों से तो कोई 10 वर्षों से तैनात था। बीते अक्टूबर 2020 से कुछ माह को छोड़कर डीबीए को वेतन भी नहीं मिला है। बावजूद इसके परिवहन महकमा के क्षेत्रीय कार्यालयों में डीबीए पूरी तन्मयता से तैनात हैं। वहीं कुछ माह पूर्व वेतन न मिलने का मामला सामने आने पर डीबीए का स्थानांतरण की कवायद शुरू हुई। परिवहन विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों में तैनात डीबी ऊंची पहुंच वाले हैं। ऐसे में इनके हस्तांतरण को लेकर ऊहापोह स्थिति बनी रही। अंततः बीते 2 अक्टूबर को स्थानांतरण का आदेश जारी हो गया। सूत्रों की माने तो डीबीए के तबादला की सूची किसने बनाई और 2 अक्टूबर गांधी जयंती सार्वजनिक अवकाश के दिन यह आदेश किसने जारी किया यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।परिवहन परिवहन मुख्यालय में यह बताने को कोई तैयार नहीं है। लखनऊ संभाग के हरदोई जनपद के डीबीए की मौत कोरोनाकाल में हो गई थी। हरदोई में डीबीए की तैनाती को लेकर सेवा प्रदाता कंपनी केडीएस ने दो बार रिक्तियां निकाली। केडीएस द्वारा डीबीए के पद पर जिसका चयन किया गया उसे आज तक तैनाती नहीं मिली। इस दौरान विभाग ने सीतापुर जनपद में तैनात बीबीए का स्थानांतरण हरदोई कर दिया। नए डीबीए के चयन के बाद किसी और को भेजे जाने का आदेश सवालों के घेरे में है। सूत्रों की माने तो हरदोई जनपद के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन की ओर से डीबीए का कार्य किसी अनाधिकृत व्यक्ति से लिया जा रहा है। डीबीए का कार्य करने वाला अनाधिकृत व्यक्ति एनआईसी में उच्च पद पर तैनात व्यक्ति का करीबी बताया जाता है। अनधिकृत व्यक्त की तैनाती को लेकर एनआरसी के उच्च अधिकारी द्वारा परिवहन विभाग के अधिकारियों पर कई बार दबाव भी बनाए जा चुका है। अब हरदोई में डीबीए पद पर केडीएस द्वारा चयनित व्यक्ति या सीतापुर से तबादला पाने वाला अथवा अनधिकृत रूप से कार्य कर रहा वक्त काम करेगा यह गुत्थी सुलझ नहीं रही है। इसी बीच एक मामला और सामने आ गया है। बताते हैं कि रायबरेली ट्रांसफर पाए डीबीए की परिवहन आयुक्त से शिकायत हो गई है। सुल्तानपुर से रायबरेली ट्रांसफर किए गए डीबीए विकास सिंह शिकायत जनपद के ही एक व्यक्ति ने परिवहन आयुक्त से की थी। बीते 25 अक्टूबर को की गई शिकायत में कहा गया है कि जनपद के डिंडोली गांव निवासी विकास सिंह के पिता के नाम दो मोटर ट्रेनिंग स्कूल एवं एक प्रदूषण जांच केंद्र हैं। इसके साथ ही रायबरेली परिवहन कार्यालय के सामने एक दुकान भी है। उनके पिता का काफी पुराना नाता आरटीओ ऑफिस से है। ऐसे में उनकी तैनाती से कार्यालय की गोपनीयता भंग होगी इसमें संशय नहीं है। परिवहन कार्यालय का संचालन व गोपनीयता सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी के हाथ में न होकर डीडीए के हाथ में होगी। गोपनीयता भंग न हो इसके लिए अन्यत्र तैनाती की मांग की गई है। ऐसे में उक्त डीबीए के गृह जनपद में स्थानांतरण का आदेश भी बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि शिकायत के बाद डीबीए से विवरण मांगा गया है। रायबरेली ट्रांसफर पाए उक्त डीबीए की शिकायत पर अब जनपद के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ने व्यक्तिगत विवरण मांगा है। बीते 4 नवंबर को लिखे गए पत्र में उप परिवहन आयुक्त लखनऊ परिक्षेत्र के 3 नवंबर को लिखे गए पत्र संख्या-1137 का उल्लेख किया गया। पथ में नवागत डीबीए को तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। संपूर्ण व्यक्तिगत विवरण व पारिवारिक पृष्ठभूमि की रिपोर्ट 3 दिनों में उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। अयोध्या जनपद के डीबीए के मऊ स्थानांतरण के बाद यह पद रिक्त चल रहा है। रायबरेली जनपद के डीबीए का अयोध्या तबादला किया गया था।हालांकि अभी तक डीबीए ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है।

Related Articles

Comments

Back to Top