यूपी : दिनभर ऐसे चलता रहा एसएसपी का आपरेशन ए रिश्‍वत, हेड कांस्‍टेबल/कारखास के पकड़े जाने पर इंस्‍पेक्‍टर फरार

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मेरठ।

मेरठ में एसएसपी प्रभाकर चौधरी के बिछाए जाल में हेड कांस्‍टेबल और इंस्‍पेक्‍टर फंस गए। दिनभर ऐसे चलता रहा एसएसपी का आपरेशन ए रिश्‍वत, हेड कांस्‍टेबल के पकड़े जाने पर इंस्‍पेक्‍टर फरार मेरठ में घूस लेते पकड़ा गया हेड कांस्‍टेबल।
एसएसपी प्रभाकर चौधरी के मोबाइल पर एक काल आईं थी । कालर ने बताया कि ट्रक के फर्जी मुकदमे में सदर बाजार पुलिस ने मोटी वसूली कर ली है। वसूली की कुछ रकम उधार की गई थीं, जिसे मंगलवार को दिया जाएगा। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने इस कार्य के लिए एसपी सिटी विनीत भटनागर को लगा दिया। एसपी सिटी ने मंगलवार की सुबह से ही सदर बाजार थाने के आसपास अपनी टीम को लगा दिया।

एसपी सिटी खुद आफिस में बैठकर टीम से लगातार अपडेट लेते रहे। करीब शाम को चार बजे मुजफ्फरनगर के खतौली निवासी वकार सदर बाजार थाने के बाहर पहुंचे। वकार ने हेडकांस्टेबल मनमोहन को मोबाइल से काल की। मनमोहन ने वकार को बताया कि सदर बाजार थाने से चंद कदमों की दूरी पर डाकखाना हैं, वहां पर मिलें। मनमोहन से पहले वकार डाकघर पर पहुंचे गए। उसके बाद बाइक पर सवार होकर मनमोहन डाकघर पर पहुंचे। उससे पहले एसपी सिटी की टीम डाकघर के आसपास ही छिपकर बैठी हुई थी।

वकार ने मनमोहन को 30 हजार की बकाया रकम दी। उसके बाद वकार वहां से लौट रहा था। तभी एसपी सिटी की टीम ने वकार और मनमोहन दोनों को पकड़ लिया। मनमोहन की तलाशी ली गई, उसकी जेब से 30 हजार की रकम बरामद हुई। मनमोहन से रकम के बारे में जानकारी ली गई। वह कोई जवाब नहीं दे पाया। उसके बाद पुलिस की टीम मनमोहन को उठाकर एसपी सिटी के आफिस लेकर आ गई। वहां पर मनमोहन से एसपी सिटी ने बातचीत की। उसके बाद मनमोहन को लेकर पुलिस लाइन स्थित आदेश कक्ष में लाया गया। यहां पर मनमोहन ने एसएसपी के सामने पूरे घटनाक्रम को बयां किया। मनमोहन के बयानों को रिकार्ड भी कर लिया गया।

*मनमोहन धरा गया तो इंस्पेक्टर प्रयागराज रवाना*

हेडकांस्टेबल/ कारखास मनमोहन की धरपकड़ की खबर मिलते ही इंस्पेक्टर बिजेंद्र राणा प्रयागराज रवाना हो गए। उन्होंने किसी भी अफसर से प्रयागराज जाने की अनुमति नहीं ली है। बल्कि पुलिस के वाट्सएप ग्रुप पर लिख दिया कि हाईकोर्ट में सीए दाखिल करने के लिए जा रहे हैं, एसएसआइ गौरव राना को चार्ज सुपुर्द कर दिया है, जबकि सीए दाखिल करने के लिए हाईकोर्ट जाने के लिए कप्तान की अनुमति लेनी पड़ती है। इंस्पेक्टर की अचानक से प्रयागराज जाने की घटना को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। इंस्पेक्टर बिजेंद्र राणा ने फोन पर बताया कि उनके संज्ञान में मामला नहीं है। वह तो प्रयागराज के लिए ट्रेन में बैठे हैं।


*यह बोले हेड कांस्टेबल मनमोहन*

ट्रक स्वामी व चालक को बुलाया गया। उसके बाद ट्रक कटान का आरोप खतौली के वकार पर लगा था। वकार को भी पुलिस ने थाने बुलाया। एएसपी सूरज राय की मौजूदगी में बातचीत हो गई। सभी पर अभी कोई अपराध नहीं बनता था। ऐसे में ट्रक स्वामी इमरान व चालक अब्दुल कलाम को ट्रक ढूंढ कर लाने के निर्देश दिए, जबकि वकार को छोड़ने को कहा। उसके बाद एएसपी निकल गए। तब इंस्पेक्टर ने ट्रक स्वामी और चालक को छोड़ने की एवेज में तीन लाख की रकम वसूली। उसके बाद वकार को छोड़ने के लिए एक लाख की रकम तय हो गई। वकार ने 50 हजार की रकम थाने के कारखास  मनमोहन सिपाही को दे दी। मनमोहन ने बताया कि इंस्पेक्टर के आदेश पर वकार से रकम वसूली थी।

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