प्रदेश की विद्युत आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए 121 पारेषण उपकेन्द्रों का निर्माण
जनपत की खबर Aug 09, 2021 at 09:17 PM , 412उपकेन्द्रों के निर्माण पर 12 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा का किया गया निवेश
वर्ष 2022 तक 28000 मेगावाट होगी पारेषण क्षमता-ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा
लखनऊः दिनांकः 09 अगस्त, 2021
प्रदेश में उच्च गुणवत्तायुक्त, कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये पारेषण क्षमता को बढ़ाने हेतु युद्ध स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। विगत 04 वर्षों में पारेषण क्षमता को बढ़ाकर 25000 मेगावाट तक किया जा चुका है। वर्ष 2022 तक यह क्षमता 28000 मेगावाट तक पहॅुच जायेगी।
प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने उ0प्र0 पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन की समीक्षा करते हुये बताया कि वर्ष 2017 से अब तक 12 हजार 182 करोड़ रूपये से 121 पारेषण उपकेन्द्रों का निर्माण हुआ। प्रदेश में स्थापित की जा रही तापीय परियोजनाओं से ऊर्जा निकासी हेतु आवश्यक पारेषण तन्त्र का निर्माण पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (पी0पी0पी0) के माध्यम से कराया जा रहा है, जिसके अन्तर्गत 400 केवी उपकेन्द्र फिरोजाबाद एवं बदॉंयू ऊर्जीकृत किये गये हैं। इसी पद्धति से 765 केवी उपकेन्द्र मेरठ, रामपुर एवं 400 केवी उपकेन्द्र सिम्भवली एवं सम्भल भी निर्माणाधीन है। इस परियोजनाओं में 2433.70 करोड़ रूपये निवेश किया गया हैं। इन परियोजनाओं को इसी वित्तीय वर्ष में ऊर्जीकृत कर दिया जाएगा।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश की जनता को 24 घण्टे कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति करना चाहती है। लेकिन यह तभी सम्भव हो सकता है, जब हमारा पारेषण तन्त्र सभी क्षेत्रों को विद्युत ले जाने में सक्षम हो। सरकार बनने के बाद इस पर गंभीरता पूर्वक काम किया गया है, जिसके अन्तर्गत हापुड़ जनपद में पीपीपी माध्यम से 765 के0वी0 उपकेन्द्र का निर्माण कराया गया। इस पर एक हजार करोड़ रूपये की लागत आयी। इसी तरह 12 नग 400 के0वी0 उपकेन्द्रों का निर्माण मथुरा (माठ),बांदा, बिजनौर (नेहटौर-पीपीपी), आगरा (साउथ आगरा), गाजियाबाद (अटौर-पीपीपी), गाजियाबाद (इन्द्रापुरम-पीपीपी), गाजियाबाद (डासना-पीपीपी), प्रयागराज (मसौली), गौतमबुद्ध नगर (नोएडा सेक्टर-148), गौतमबुद्ध नगर (नोएडा सेक्टर-123), फिरोजाबाद (पीपीपी) एवं बदांयू (पीपीपी) में निर्मित कराये गये। इन पर 4484.41 हजार करोड़ रूपये की लागत आयी।
उन्होंने कहा कि विद्युत पारेषण में 220 के0वी0 उपकेन्द्रों का अत्यधिक महत्व है। इसके लिये 34 उपकेन्द्रों के निर्माण पर लगभग 4015 करोड़ रूपये खर्च किया गया, जिसमें चन्दौसी (सम्भल), छाता (मथुरा), अमरोहा, अमरोहा, हापुड़, पीलीभीत, आजमगढ़-द्वितीय, सिद्धार्थनगर, लखनऊ (सीजी सिटी), फर्रूखाबाद (नीबकरोरी), सरसावां (सहारनपुर) लखनऊ (कानपुर रोड), बाराबंकी, कानपुर नगर (साढ़), राय बरेली (बछरावां), सिकन्दरा (कानपुर देहात), गालियाबाद (मण्डोला विहार), गालियाबाद (प्रताप बिहार), कानपुर (फूलबाग), गालियाबाद (मधुबन बापूधाम), मथुरा (वृन्दावन), कासगंज, मुजफ्फरनगर (बधाईकला), बागपत (निरपुरा), कुशीनन्द (हाटा), चित्रकूट (पहाड़ी), गोरखपुर (गोला), अमेठी, उन्नाव (दही चौकी), नोएडा (बॉटनिकल गार्डेन ), वाराणसी (राजा का तालाब), मेरठ (परतापुर) एवं फतेह (मलवां) जनपदों में उपकेन्द्र बनाये गये। इससे इन क्षेत्रों के लाखों उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति में सुधार हुआ और उन्हें पहले की तुलना में अब कटौती मुक्त निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्राप्त हो रही है।
इसी तरह इन वर्षों में महमूदाबाद, हमीरपुर, गढ़मुक्तेश्वर, सलोन, मवाना रोड हस्तिनापुर, दनकौर, बन्डा, गभाना, नवाबगंज, ग्वालियर रोड, बिचपुरी, प्रयागपुर, बिन्दवल जय राजपुर, जारी, लालपुर, जलालाबाद, भोपा, नवाबगंज (बरेली), भूड़- द्वितीय, बन्नत, अम्बाला रोड-द्वितीय, बरहन, भटहर, तालग्राम, मोरना, मुसाफिर खाना, पूर्णाछापर, सहसवान, रानीगंज, इटवा, पसही तथा कैसरगंज सहित 74 नग 132 केवी विद्युत उपकेन्द्रों का निर्माण किया गया। इस पर 2682.88 करोड़ रूपये का निवेश किया गया।
सम्पर्क सूत्र: सी0एल0 सिंह
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