नगर निगम में सफाई के नाम पर फर्जीवाड़ा,रसूखदार कार्यदायी संस्थाओं को ही काम

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लखनऊ। लखनऊ। नगर निगम में सफाई के नाम पर फर्जीवाड़ा हो रहा है। जिससे नगर निगम को हर महीने लाखों रुपये की चपत लग रही है। यही कारण है कि शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। जिन रसूखदार कार्यदायी संस्थाओं को शहर की सफाई का जिम्मा सौंपा गया है उनके द्वारा सफाई कर्मचारियों की तैनाती में फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। नगर आयुक्त अजय द्विवेदी की कार्रवाई के बावजूद कार्यदायी संस्थाएं सुधर नहीं रही हैं।

नगर निगम द्वारा शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से आठों जोनों में लगभग 8 हजार सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं। इन्हें प्रतिदिन लगभग 332 रुपये दिए जाते हैं। इस हिसाब से इन कर्मचारियों के वेतन पर लगभग 2.65 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च आता है। इसके अलावा नगर निगम के नियमित सफाई कर्मचारी भी तैनात हैं। इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था सुधर नहीं रही है। रसूखदार कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से शहर में 1 से 2 हजार सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं। लेकिन निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में इनके आधे भी सफाई कर्मी मौके पर नहीं मिलते हैं।
इन पर निगरानी की अभी तक नगर निगम द्वारा कोई व्यवस्था नहीं है। नगर आयुक्त अजय द्विवेदी द्वारा जब​ भी क्षेत्र में निरीक्षण किया गया तो उन्हें कार्यदायी संस्थाओं के कर्मचारी आधे से भी कम मिले। इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि आधे से अधिक फर्जी कर्मचा​री दिखाकर नगर निगम को हर महीने लगभग सवा करोड़ रुपये की चपत लगायी जा रही है। वहीं कार्रवाई के नाम पर केवल कार्यदायी संस्थाओं पर जुर्माना लगा दिया जाता है, जो नाकाफी साबित हो रहा है। फर्जीवाड़ा कर रहीं इन कार्यदायी संस्थाओं के कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने की नगर निगम के अधिकारी हिम्मत नहीं दिखा पाते हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार कार्यदायी संस्थाओं के पास उतने कर्मचारी ही नहीं हैं और इनकी शासन में भी उंची पहुंच है। जिसके चलते इन पर नगर निगम कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाता है। यहां तक कि इनके द्वारा दोगुने से भी ज्यादा सफाई कर्मचारी दिखाकर नगर निगम से भुगतान करा लिया जाता है। इसमें पटल देख रहे बाबू से लेकर अधिकारियों की भी मिलीभगत रहती है। फर्जीवाड़े से नगर निगम को हर महीने एक ओर करोड़ों रुपये की चपत लगायी जा रही है। साथ ही लखनऊ को स्वच्छता रैंकिंग में टॉप पर लाने के प्रयास पर पानी फिर रहा है।


नगर निगम में रसूखदार कार्यदायी संस्थाओं को ही सफाई कर्मचारियों की तैनाती का कार्य मिलता है। इन कार्यदायी संस्थाओं द्वारा हजारों कर्मचारी होने का दावा तो किया जाता है लेकिन यह दावे हवा हवाई साबित होते हैं। वहीं मैनपावर सप्लाई के कार्य में 25 से लेकर 100 कर्मचारियों वाली संस्थाओं की अनदेखी की जा रही है। इसके अलावा नगर निगम में बड़ी और चुनिंदा कार्यदायी संस्थाओं के हित ध्यान में रखकर नियम बना दिए गए हैं, जिससे काई भी कम कर्मचारियों की संस्था ना आ सके।

कार्यदायी संस्थाओं द्वारा तैनात सफाई कर्मचारियों का समय-समय पर क्षेत्र में निरीक्षण कर सत्यापन कराया जाता है। कर्मचारी कम पाए जाने पर अर्थदंड लगाया जाता है, जिससे भय बना रहे। नगर निगम जल्द ही सभी कर्मचारियों की मोबाइल से हाजिरी की व्यवस्था करने जा रहा है। जिनकी हाजिरी ऐप से मिलेगी उन्हें ही उपस्थित माना जाएगा और फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी…अजय कुमार द्विवेदी, नगर आयुक्त, नगर निगम लखनऊ

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