SIET लखनऊ उ०प्र० द्वारा द्वितीय आलेख लेखन ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन

हेडलाइंस , 681

लखनऊ।
SIET लखनऊ उ०प्र० के तत्वावधान में आज से तीन दिवसीय द्वितीय आलेख लेखन ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। तीन दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को जूम प्लेटफार्म, फेसबुक, यूट्यूब, ट्विटर पर दिनांक: 13 जुलाई 2021 से 15 जुलाई 2021 समय : पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 2 बजे तक पूरे समय तक जुड़े रहकर प्रतिभाग करने पर SIET लखनऊ उ०प्र० द्वारा प्रमण पत्र भी प्रदान किया जाएगा। आज कार्यक्रम का आरंभ राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान की ओर से प्रशासनिक अधिकारी विनोद सिंह   द्वारा अपने उदबोधन से किया गया उन्होंने बताया  कि राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान का उद्देश्य शैक्षिक वीडियो तैयार करना और शिक्षा में तकनीकी को बढावा देना है। इसके साथ ही संस्थान द्वारा स्क्रिप्ट तैयार कर शैक्षिक फिल्म का निर्माण किया जाता है और उस फिल्म को भारत सरकार को भेजा जाता है। इस दौरान राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान की निदेशक  ललिता प्रदीप द्वारा कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ  किया गया। उनके द्वारा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदरणीय प्रोफेसर अमरेंद्र प्रसाद बेहरा संयुक्त निदेशक सीआईईटी,एनसीईआरटी तथा विशेषज्ञ प्रोफेसर इंदु कुमार नेशनल कॉर्डिनेटर दीक्षा, सीआईईटी,एनसीईआरटी का स्वागत कर हार्दिक अभिनंदन किया गया। उसके उपरांत कार्यक्रम के संचालक राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान लखनऊ उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी विनोद सिंह द्वारा दिनेश जोशी से को पिछले वर्कशॉप की वीडियो दिखाने के लिए निवेदन किया गया। तत्पश्चात दिनेश जोशी जी ने प्रथम आलेख लेखन कार्यशाला जो 30 जून से 2 जुलाई तक आयोजित आयोजित की गई थी,का वीडियो प्रदर्शन किया। उसके उपरांत प्रोफेसर अमरेंद्र प्रसाद बेहरा ने सभी प्रतिभागियों का अभिनंदन और एसआईईटी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस कार्यशाला के दूरगामी परिणाम प्राप्त होंगे। साथ ही 34 साल बाद नई शिक्षा नीति में शिक्षा में आईसीटी के प्रयोग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने उसको बहुभाषी विकसित करने पर बताते हुए कहा कि  हमारी पांच मूल भाषाएं हैं और उत्तर प्रदेश में कई भाषाएं हैं। जैसे बृजभाषा भोजपुरी बोली जाती है हमें इस पर आधारित  आईसीटी के प्रोग्राम तैयार करने हैं। केवल पठन-पाठन ही नहीं रिसर्च में भी आईसीटी का प्रयोग होना चाहिए।जो बच्चे बच्चे पढ़ने लिखने में असमर्थ हैं उनके विजुअल तरीके से समझाने के लिए वीडियो बनानी चाहिए।एनसीआरटी की किताबें टॉकिंग रूप से यानी बोलते हुए बनाई जानी चाहिए।हमें 2D,3D से लेकर 7D वीडियो बनाने की जरूरत है। हमारा 65 पेज का दस्तावेेज है जो सभी को पढ़ना चाहिए। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन की बात करें तो हम अपने आप को डिजिटल कॉन्टेंट के कंजूमर(उपभोक्ता) के रूप में देखते हैं। हम कंटेंट क्रिएटर भी हैं और यूजर भी हैं। एक पटकथा अच्छी है तो उससे प्रोग्राम अच्छा बनाना आसान हो जाता है।कंटेंट अच्छा है तो बच्चे जरूर देखेंगे। कंटेंट को इंटीग्रेटेड फॉर्म में व्यवस्थित करें यानी जो शुरू से आखिर तक दर्शकों को बांधे रखे। उन्होंने आनलाईन कार्यशाला में साइंस का उदाहरण देते हुए कहा यह रोचक नहीं होंगे तो बच्चे कैसे रूचि लेंगे। इसलिए प्रयोग में बच्चों को इंटरेस्टिंग तरीके से प्रतिभाग करायें। जैसे हवा स्थान गिरती है अर्थात बच्चे जब गुब्बारे में हवा भरें तो उन्हें दिखना चाहिए जितनी गुब्बारे में हवा भरी है इतना ही पानी बाहर निकल रहा है तो बच्चा इससे आसानी से और उत्साह के साथ सीखेगा। उन्होंने कहा हमें संवैधानिक मूल्यों,मौलिकता, सामाजिकता का अपने आलेख में ध्यान रखना है। उन्होंने कहा
आलेख में Communication, Creativity, Collaboration होना चाहिए। उन्होंने कहा बहुत खुशी की बात है कि उत्तर प्रदेश में बहुत ज्यादा अध्यापक आईसीटी का प्रयोग कर रहे हैं लेकिन उनमें नवाचार होना चाहिए।
टीवी कार्यक्रम में ऐसा कंटेंट डालें जो बच्चे की उड़ान को आगे की ओर बढ़ाएं।
बच्चों को एक्सपेरिमेंट कराते हुए, दिखाते हुए सिखाते हुए खतरनाक तरीकों से बचाना चाहिए।
  अंत में मेरा यह अनुरोध है कि हमारा काम है बच्चों को रोचक और प्रभावशाली कंटेंट दें।यह हमें सोचना है कि हम बच्चों को अनुकरणीय  हनुकरणीय बनाएं ? बच्चों में  Fluency, Flexibility और Originality होनी चाहिए यानी बच्चे की भाषा फराटेदार हो,बच्चों को प्रॉब्लम सॉल्विंग बनाएं।लाइफ में ह्यूमर होना चाहिए।

*ललिता प्रदीप*:
  उत्तर प्रदेश में सबसे पहले हमने लॉकडाउन के समय अप्रैल में ऑनलाइन एजुकेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जिसका बहुत फायदा हुआ। लोगों ने बड़े उत्साह के साथ में बहुत कुछ सीखा और अपने स्कूलों में लागू किया।

*विनोद सिंह*:(पिछली कार्यशाला के बारे में बताते हुए)
 हमने पिछली वर्कशॉप में राष्ट्रीय और राज्य पुरस्कार सहित विभिन्न प्रकार के अवॉर्डी टीचर्स को जोड़कर उनसे संवाद स्थापित किया श।हमने 30-35 जिलों में अच्छे स्कूलों की शूटिंग कर शैक्षिक वीडियो तैयार कीं।

(दिनेश जोशी जी को फिल्म दिखाने के लिए निवेदन किया)

*एक चिड़िया अनेक चिड़िया* फिल्म का प्रदर्शन

*ललिता प्रदीप*: यह फिल्म मैं दिन में जितनी बार भी देखूं तो ऐसा लगता है कम है बार-बार इसको देखने का मन करता है।
(प्रोफ़ेसर इंदु कुमार जी का परिचय कराते हुए कहते हैं) 

*बिनोद सिंह*:हम कामना करते हैं कि हमारे एसआईईटी के टीचर सीआईईटी तक पहुंचे

*प्रोफ़ेसर इंदु कुमार*: (आदरणीय निदेशक ललिता प्रदीप और विनोद सिंह जी तथा सभी प्रतिभागियों और टेक्निकल टीम का स्वागत करते हुए)

स्क्रिप्ट राइटिंग हम किस तरह से कर सकते हैं ?
प्रभावशाली आलेख निर्माण में एंटरटेनमेंट या मीडिया के लिए प्रोग्राम बनाने में हमें ज्यादा परेशानी या बंधन नहीं होते जबकि शैक्षिक कार्यक्रमों में हमें उद्देश्य से भटकना नहीं चाहिए और हमें दर्शकों को बांधकर भी रखना है।
  सबसे पहले विषय वस्तु का चयन करें।वीडियो लेक्चर भी वन साइड नहीं होना चाहिए।कांसेप्ट को बोधगम्य बनाने की जरूरत है।ब्लैक बोर्ड की तरह और टी एल एम के इस्तेमाल करने की तरह वीडियो लेक्चर में हमें इंटरेस्टिंग कंटेंट्स डालने की जरूरत है यानी आलेख लेखन क्रुशियल बनाने की जरूरत है।आलेख में इनपुट और अनुसंधान की भी आवश्यकता है।  विनोद सिंह ने अजीत कुमार होरो जोकि रेडियो की दुनिया के नामचीन शख्सियत हैं जिनकी कई फिल्म और रेडियो प्रोग्राम अवार्ड प्राप्त कर चुके का स्वागत किया.।अजीत कुमार होरो नें बताया सूर्य की किरणों के बाद अगर कोई दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभाव डालती है तो वह है रेडियो तरंगे। इस पर उन्होंने प्रतिभागियों को अमेरिका की कहानी सुनाते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। और
रेडियो आलेख लेखन के बारे में विस्तार से बताते हुए ब्रॉडकास्ट नैरोकास्ट इंटरनेट ब्रॉडकास्ट क्रिएटिव राइटिंग।ऐसा लेखन जिससे प्रकाश फैलता हो। उन्होंने कहा रेडियो के लिखने का मतलब है *कान* के लिए लिखना। ऑडियो प्रोग्राम को रोचक बनाने के लिए जरूरी है कि अवधि बहुत लंबी ना हो और पात्र कम से कम हो। ●यह ध्यान रखना चाहिए कि क्या करें और क्या ना करें 
●होठों पर हंसी होनी चाहिए चाहे दिल रोता रहे
●शब्द बिल्कुल सिंपल होने चाहिए
लंबे शब्दों का प्रयोग ना करें
●कहानी सुना कर स्पष्ट करें।डॉक्यूमेंट्री और डॉक्यूड्रामा को स्पष्ट किया गया। उन्होंने एक उद्घोषक की तरह बोल कर दिखाया। उसके उपरांत दिनेश जोशी  द्वारा ललितपुर जनपद के एक स्कूल की फिल्म का प्रदर्शन किया गया। जिसमें गाना- *चाहे हो कितनी मजबूरी है शिक्षा बहुत जरूरी* लोगों को अच्छा लगा। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अमरेन्द्र सहाय अमर नें पिछली कार्यशाला में प्राप्त हुई स्क्रिप्ट की प्रशंसा करते हुए प्रतिभागियों को समझाया कि किस प्रकार सबसे पहले विषय का चयन शीर्षक ●विषय की विस्तृत जानकारी जो विशेष लिखे जा रहे हैं उसकी जानकारी होनी चाहिए। भाषा और शैली सरल और समझने वाली जो बच्चों के लिए ग्राह्य हो एवं आलेख लेखन की शुरुआत और समापन में लोगों का ध्यान आकर्षण रोचक हो उन्होंने बताया कि 
◆ आलेख लेखन में नयापन होना चाहिए 
◆ आलेख जिज्ञासा बढ़ाने वाला हो स्पष्ट होना चाहिए 
◆ भाषा सरल और सहज हो रिपीटेशन नहीं होना चाहिए  
◆ निरंतरता बनी रहनी चाहिए इसके साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों को स्कूल चलो अभियान से संबंधित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन कर  गाना- *हमारे दोस्त मास्टर जी हैं* दिखाया. इस दौरान उन्होंने आलेख लेखन की कई बारिकियों से प्रतिभागियों को रूबरू कराया।
कार्यक्रम का समापन राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान की निदेशक ललिता प्रदीप  द्वारा मुख्य अतिथि,विशेषज्ञों टेक्निकल टीम, कोर टीम एवं सभी प्रतिभागियों को प्रेरणादायक विचारों के साथ धन्यवाद ज्ञापित किया गया। विनोद सिंह नें पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा..इंटरनेट पर आज सब कुछ उपलब्ध है लेकिन यह सही है या गलत वह गुरु ही बतायेगा। इस अवसर पर कार्यक्रम में ज्योति कुमारी, विमल आनन्द,अभय राज,सुरभि शर्मा,स्मिता जायसवाल,आलोक शुक्ला, अनुपम चौधरी,वाणी शर्मा,कविता वर्मा, मौ० यामीन आदि ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

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