अपर मुख्य सचिव के आदेश को नहीं मानते कोतवाल डीके. श्रीवास्तव

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नगर कोतवाल ने कृषि यंत्र की दुकान का काटा रु0 5000 का चालान

मऊ। नगर कोतवाल की मनमानी चरम पर है। कोतवाल साहब को अपने हुक्मरानों की भी कोई परवाह नहीं है। कोतवाल साहब इतने तानाशाह हो गए हैं कि उन्हें अपर मुख्य सचिव का आदेश भी कागज का टुकड़ा सा लगता है। दरअसल कोतवाल साहब  कोविड गाइडलाइन का पालन कराने निकले थे। उन्हे सड़क जो मिला उसका चालान काटने लगे। गस्त के दौरान पहुंच गए मऊ के सबसे पुराने कृषि संयंत्र फर्म न्यू कानपुर मशीनरी पर। इस फर्म पर खेती बारी से जुड़े यंत्र यानी रोटावेटर, हैरो, लेबलर, थ्रेशर, कीटनाशक स्पे्रयर, ट्यूबवेल संबंधित कृषि यंत्र की बिक्री की जाती है।
मौजूदा हालात में कोविड महामारी के दौरान घोषित कर्फ्यू में प्रदेश के पर मुख्य सचिव द्वारा दिनांक 15 मई को जारी शासनादेश में कृषि यंत्र व कीटनाशक दवाओं की बिक्री हेतु दुकाने खोले जाने की अनुमति प्रदान की गयी थी। जिसके क्रम में मोहम्मद अरशद द्वारा अपनी दुकान का कुछ हिस्सा ही कोविड के नियमों का पालन करते हुये खोला गया था। जहां जरूरतमंद कृषकों को जरूरी सामान की बिक्री के समय सोमवार को दिन के लगभग दो बजे नगर कोतवाल डी.के.श्रीवास्तव व नगर मजिस्ट्रेट जे.एन.सचान द्वारा इस दुकान का जबरिया चालान काटा गया। जबकि दुकान मालिक अरशद ने "अपर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश" के आदेश का हवाला देते हुये उसकी कापी भी कोतवाल व मजिस्ट्रेट को दिखाया। लेकिन वहां मौजूद अधिकारियों ने अरशद की एक न सुनी और 5000/- का चालान काट कर रसीद अरशद को पकड़ा दी। अरशद के बार-बार शासन के आदेश के बारे में व खबरनवीश होने की बात कही गयी तो उनके द्वारा धमकी दिया जाने लगा कि जल्द चालान की राशि जमा करो नहीं तो तुम्हें अभी जेल भेज दिया जायेगा। अरशद 'दुकान मालिक' मानसम्मान के डर के मारे विवश होकर चालान राशि 5000/- नगद दिया।
हालांकि इस मामले परअरशद ने सूबे के मुख्यमंत्री को रस्टिर्ड डाक द्वारा आग्रह किया है कि प्रार्थी द्वारा नियम के तहत अपनी दुकान खोलकर कृषि यंत्र व कीटनाशक स्पे्रयर की विक्री के समय जबरिया चालान किये जाने के विरूद्ध उचित कानूनी कार्यवाही करने की कृपा करें। ताकि प्रार्थी से नियम विरूद्ध चालान काटते हुये ली गयी धनराशि 5000/- वापस हो सके।
गौरतलब है कि 15 मई को पत्रांक संख्या- 861, अपर मुख्य सचिव, उत्तरप्रदेश द्वारा जारी आदेश में कृषि संबंधित दुकानों को खोलने की अनुमति दी गई थी। लेकिन आज दिनांक 31.05.2021 को पुलिस व प्रशासन द्वारा कृषि संबंधित दुकान का चालान किया गया।
अब सवाल यह है कि आखिरकार सूबे के मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव के आदेश को क्यों नहीं मान रहे नगर कोतवाल? क्या इसी तरह किसानों और कृषि संबंधित लोगों की आय दोगुनी होगी ? 

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