*श्री नरेन्द्र मोदी: सबसे लंबे समय तक ‘प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित’ प्रधानमंत्री*
जनपत की खबर Jun 25, 2026 at 05:15 PM , 107सुश्री शर्मिष्ठा मुखर्जी
भारत में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता को लेकर चल रही बहस के बीच, मुझे मेरे पिता, स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी की 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अभूतपूर्व जीत के बारे में बताई गई एक दिलचस्प बात याद आती है। उस समय बाबा भारत के 13वें राष्ट्रपति थे। अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े होने के बावजूद, उनके बीच बहुत अच्छे संबंध थे, जो शायद एक सच्चे लोकतंत्र की वास्तविक पहचान है।
चुनाव परिणाम आने के बाद, मोदी जी राष्ट्रपति भवन में बाबा से मिलने आए। बातचीत के दौरान, बाबा ने मोदी जी से चुनाव के बारे में उनका विश्लेषण पूछा। उन्होंने उत्तर दिया कि तीन दशकों के बाद किसी राजनीतिक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है। तब बाबा ने अपने विशिष्ट प्रोफ़ेसर वाले अंदाज़ में पूछा, 'और क्या?' जब मोदी जी चुप रहे, तो बाबा ने बताया कि 2014 का लोकसभा चुनाव इतिहास में अनोखा था, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर एक नया चेहरा पहले ही घोषित कर दिया गया था। भारतीय जनता पार्टी को मिला लोगों का अपार समर्थन केवल उनकी पार्टी के लिए नहीं था, बल्कि यह लोगों का श्री नरेन्द्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री बनाने के लिए सीधा जनादेश था। दूसरे चुनावों के विपरीत, जहाँ प्रधानमंत्री का चेहरा या तो मान लिया जाता है पर आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया जाता; या परंपरा के अनुसार नवनिर्वाचित सांसद उनका चुनाव करते हैं; या यह गठबंधन के गणित से तय होता है और यह प्रक्रिया चुनाव के बाद होती है। मोदी जी से पहले डॉ. मनमोहन सिंह, जो कभी जन-नेता नहीं रहे, उन्हें तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने चुना था। भारत के दो प्रधानमंत्री, श्री पी.वी. नरसिम्हा राव और श्री एच.डी. देवेगौड़ा - तो प्रधानमंत्री बनने के समय संसद के सदस्य भी नहीं थे। सरल शब्दों में कहें तो, प्रधानमंत्री का चुनाव वरिष्ठ राजनेता करते थे। 2014 भारतीय राजनीति के चुनावी समीकरणों में एक बहुत बड़ा बदलाव था, जहां देश की जनता ने श्री नरेन्द्र मोदी को लगभग 'राष्ट्रपति चुनाव' की ही तरह, स्पष्ट रूप से और बिना किसी संदेह के अपना प्रधानमंत्री चुना।
उल्लेखनीय है कि 2014 से पहले श्री नरेन्द्र मोदी जी 'राष्ट्रीय' राजनीति में नए थे। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने लंबे कार्यकाल के दौरान अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई थी, लेकिन 2014 उनका पहला लोकसभा चुनाव था। यह एक अनोखी बात है कि पहली बार सांसद बनने वाले व्यक्ति ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार संसद भवन में प्रवेश किया। (पुरानी) संसद की सीढ़ियों पर 'प्रणाम' करने का उनका भावुक कदम हृदय को छू लेने वाला ऐसा क्षण था, जिसने करोड़ों भारतीयों के हृदय में अपनी जगह बना ली।
चुनाव में विजय का कभी भी कोई एक कारण नहीं होता; यह कई कारकों से जुड़ी एक जटिल प्रक्रिया है। भाजपा का ज़मीनी स्तर पर मज़बूत संगठन, अलग-अलग जातियों और समुदायों तक लगातार पहुँचने की रणनीति, अपनी गलतियों को शीघ्र पहचानना और तुरंत सुधार करने की इच्छाशक्ति — ये कुछ ऐसी मुख्य बातें हैं जिन्होंने विद्यमान भाजपा को चुनाव जीतने वाली एक ऐसी शक्ति बना दिया है, जिसे वर्तमान में रोक पाना दुष्कर लगता है। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि श्री नरेन्द्र मोदी जी का चेहरा शायद भाजपा का सबसे मज़बूत ट्रंप कार्ड है। लोग उनमें एक ऐसा मज़बूत नेता देखते हैं, जो अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के दम पर आगे बढ़ा है, न कि कांग्रेस की तरह वंशवादी विरासत या परिवार-शासित क्षेत्रीय पार्टियों की मज़बूत पकड़ के कारण।
एक तरह से श्री नरेन्द्र मोदी भाजपा के पर्याय बन गए हैं। मैं हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बारे में बंगाल के मित्रों के साथ हुई कुछ बातचीत का उल्लेख करना चाहूंगी। जहां मेरे अपने रिश्तेदार अभी भी कांग्रेस के कट्टर समर्थक हैं और बंगाल में कांग्रेस को मिले मामूली 2.9 प्रतिशत वोट शेयर में उनका भी योगदान था, वहीं मेरे अधिकतर दोस्तों और परिचितों ने भाजपा को वोट दिया था। चुनाव से पहले, मैं उनसे पूछती थी कि वे किस पार्टी को वोट देंगे। अधिकतर लोगों का उत्तर यही होता था कि वे 'मोदी' को वोट देंगे। मैं उन्हें याद दिलाती थी कि यह विधानसभा चुनाव है और मोदी जी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनका उत्तर हमेशा यही होता था—'ओई एक-ई व्यापार'—यानी 'बात एक ही है'।
श्री नरेन्द्र मोदी जी न केवल देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री हैं, बल्कि शायद स्वतंत्रता के बाद देश ने जितने भी प्रधानमंत्री देखे हैं, उनमें से वे सबसे मज़बूत नेताओं में से एक हैं। वे गठबंधन सरकारों, जो अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए दूसरों पर निर्भर रहती हैं, के उन व्यावधानों (अक्सर ब्लैकमेल करने वाले तरीकों) का शिकार हुए बिना एक मज़बूत और स्थिर सरकार देने में सफल रहे हैं। कोई उनकी कई नीतियों या काम करने के तरीके से असहमत हो सकता है और लोकतंत्र में ऐसा होना बिल्कुल सामान्य बात है; लेकिन कोई भी उनके करिश्मे और 'आकांक्षी भारत' के लिए प्रेरणा के तौर पर भारतीय मतदाताओं के साथ उनके जुड़ाव को नकार नहीं सकता। यह बात 2019 और फिर 2024 में भी स्पष्ट रूप से दिखी। आप श्री नरेन्द्र मोदी को पसंद करें या नापसंद, लेकिन आप 'ब्रांड मोदी' की अनदेखी नहीं कर सकते। बड़ी ताक़त के साथ बड़ी ज़िम्मेदारी भी आती है। एक आम नागरिक के रूप में, मैं प्रार्थना करती हूँ कि वे लोगों से प्राप्त भारी जनादेश के साथ पूरा न्याय करें और हमारे देश को और भी ऊंचाइयों तक ले जाएँ।
(लेखिका एक स्तम्भकार हैं और 'प्रणब माय फादर: अ डॉटर रिमेंबर्स' पुस्तक की लेखिका हैं। वह वर्तमान में 'प्रणब मुखर्जी लिगेसी फाउंडेशन' की संचालक हैं।)































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