TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने पीएम, शिक्षा मंत्री और सीएम को भेजा ज्ञापन
अन्य खबरे Jun 18, 2026 at 07:15 PM , 23लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में विरोध तेज हो गया है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ लखनऊ ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
महासंघ ने वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त रखने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पुराने शिक्षकों पर अब TET लागू करना उनकी सेवा सुरक्षा और आजीविका के लिए संकट पैदा कर रहा है।
ज्ञापन अपर जिला मजिस्ट्रेट महेंद्र पाल सिंह को सौंपा गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों में चिंता
महासंघ ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की ओर से 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना और भारत का सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के बाद वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET अनिवार्य होने की स्थिति बनी है।
संगठन का कहना है कि जो शिक्षक उस समय लागू योग्यता और सेवा शर्तों को पूरा करते हुए नियुक्त हुए थे, उन पर अब नई पात्रता परीक्षा की बाध्यता लागू करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
देशभर में एक साथ ज्ञापन अभियान
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बताया कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के मुद्दे को लेकर देशभर में एक साथ ज्ञापन दिए गए हैं। संगठन ने सरकार से मांग की है कि पूर्व से कार्यरत शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए TET अनिवार्यता के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।
सैकड़ों शिक्षक रहे मौजूद
ज्ञापन कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष अनुराग सिंह राठौड़, महामंत्री धर्मेंद्र सिंह, संगठन मंत्री आशीष मिश्रा, प्रांतीय मंत्री श्वेता सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
शिक्षकों ने कहा कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए।



























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