कृषि मंत्री के कार्यालय में रिटायर्ड राज पर बड़ा सवाल

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वर्षों से जमे रिटायर्ड निजी सचिव अब ओएसडी पर गंभीर आरोप, शासन स्तर पर स्थायी निजी सचिव तैनाती की मांग तेज
  

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग का मंत्री  कार्यालय इन दिनों गंभीर प्रशासनिक चर्चाओं और सवालों के केंद्र में आ गया है। विभागीय सूत्रों और कर्मचारियों के बीच लगातार यह चर्चा तेज हो रही है कि मंत्री  कार्यालय में वर्षों से जमे रिटायर्ड निजी सचिव अब ओएसडी रमेश चंद्र विश्वकर्मा और समीक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त राम नरेश वर्मा का प्रभाव इतना बढ़ चुका है कि पूरे विभाग की कार्यप्रणाली उन्हीं के इर्द-गिर्द संचालित होती दिखाई दे रही है।

सूत्रों का कहना है कि दोनों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लंबे समय से कार्यालय में प्रभावशाली जिम्मेदारियां देकर बैठाया गया है, जबकि विभाग में नियमित और स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति का मामला लगातार लंबित बना हुआ है। विभागीय हलकों में चर्चा है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों और संवेदनशील प्रशासनिक मामलों तक में इन दोनों की भूमिका अत्यधिक प्रभावशाली बनी हुई है।

कर्मचारियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर ऐसी कौन-सी विशेष परिस्थितियां हैं, जिनके चलते वर्षों से रिटायर्ड कर्मचारियों का वर्चस्व कायम है और स्थायी निजी सचिव की तैनाती नहीं हो पा रही है। चर्चा यह भी है कि अपर मुख्य सचिव कृषि स्तर तक भी इस व्यवस्था में बदलाव को लेकर कोई ठोस पहल अब तक सामने नहीं आई है, जिससे विभागीय निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार ट्रांसफर सीजन में दोनों रिटायर्ड अधिकारियों की सक्रियता चरम पर पहुंच जाती है। विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच यह धारणा बन चुकी है कि  कार्यालय से जुड़े अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय इन्हीं के प्रभाव में संचालित होते हैं। इससे नियमित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सीमित होकर औपचारिकता तक सिमटती जा रही है।

मामला केवल प्रभाव और हस्तक्षेप तक सीमित नहीं है। विभागीय चर्चाओं के अनुसार उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण संस्था से जुड़े कुछ आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मंत्री  कार्यालय में नियुक्त किया गया है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि एक महिला कर्मचारी की वास्तविक उपस्थिति संदिग्ध होने के बावजूद उनकी उपस्थिति रमेश चंद्र विश्वकर्मा द्वारा प्रमाणित कर वेतन भुगतान कराया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक रिटायर्ड निजी सचिव अब ओएसडी रमेश चंद्र विश्वकर्मा द्वारा उपस्थिति प्रमाणित कर संबंधित विभाग को भेजे जाने की चर्चाएं विभाग में तेजी से फैल रही हैं, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और गहरा गई है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार एक आउटसोर्सिंग महिला कंप्यूटर ऑपरेटर, जिनका संबंध निजी सचिव राम नरेश वर्मा के परिवार से बताया जा रहा है, उनकी कार्यप्रणाली और नियमित उपस्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा यह है कि संबंधित कर्मचारी के कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित न रहने के बावजूद उनके कार्यों का संचालन स्वयं राम नरेश वर्मा द्वारा किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभागीय गलियारों में यह मामला चर्चा और असंतोष का बड़ा विषय बन चुका है।

प्रशासनिक जानकारों का स्पष्ट मानना है कि यदि किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी को नियमों के विपरीत प्रभावशाली प्रशासनिक भूमिका प्रदान की जाती है अथवा उपस्थिति, वेतन भुगतान और विभागीय कार्यों में अनियमितता पाई जाती है, तो यह उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, वित्तीय अनुशासन तथा प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामलों में शासन स्तर से जांच बैठाकर विभागीय और कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

सूत्रों का कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कृषि मंत्री  कार्यालय में वर्षों से जमी समानांतर व्यवस्था, रिटायर्ड कर्मचारियों का असामान्य हस्तक्षेप और कई प्रशासनिक अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं। विभागीय कर्मचारियों के बीच अब यह मांग भी जोर पकड़ने लगी है कि मंत्री  कार्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए शासन तत्काल स्थायी एवं नियमित निजी सचिव की तैनाती करे, ताकि विभागीय कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का अंत हो सके।

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कर्मचारियों को  नजर शासन और अपर मुख्य सचिव कृषि पर टिकी हुई है कि आखिर इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई होती है।

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