लखनऊ में उन्नत न्यूरो फिजियोथेरेपी कार्यशाला आयोजित, विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक पुनर्वास के गुर
जनपत की खबर Jun 01, 2026 at 08:25 PM , 26पीएनएफ तकनीक, न्यूरो रिहैबिलिटेशन और खेल पुनर्वास पर देश के विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी, 35 से अधिक फिजियोथेरेपिस्ट हुए शामिल
लखनऊ। पुनर्वास एवं फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के प्रसार और विशेषज्ञों के कौशल विकास के उद्देश्य से 31 मई को होटल विजय पैराडाइज में एक्स्ट्रा केयर फिजियोथेरेपी सेंटर के तत्वावधान में पीएनएफ (प्रोप्रियोसेप्टिव न्यूरोमस्कुलर फैसिलिटेशन) आधारित उन्नत न्यूरो फिजियोथेरेपी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में लगभग 35 फिजियोथेरेपिस्ट, पुनर्वास विशेषज्ञों एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों ने सहभागिता कर आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. आकांक्षा उपाध्याय पीटी द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपी और पुनर्वास विज्ञान तेजी से विकसित हो रहे हैं तथा इस प्रकार की शैक्षणिक कार्यशालाएं विशेषज्ञों को नवीनतम तकनीकों और शोध आधारित उपचार पद्धतियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं। इससे मरीजों को बेहतर और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि Dr. Harpreet Singh Sachdeva रहे। उन्होंने पीएनएफ तकनीक, न्यूरो रिहैबिलिटेशन, चाल प्रशिक्षण (गेट ट्रेनिंग), ट्रंक कंट्रोल तथा आधुनिक पुनर्वास तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अपने व्यावहारिक अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि पीएनएफ तकनीक मांसपेशियों की शक्ति, संतुलन, समन्वय और शरीर की कार्यात्मक गतिविधियों को बेहतर बनाने में अत्यंत प्रभावी है तथा स्ट्रोक, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी, पार्किंसन रोग और अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों के पुनर्वास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट Dr. Yogesh Sethi ने खेल पुनर्वास, खिलाड़ियों में चोटों की रोकथाम और फिटनेस प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी। वहीं Dr. Santosh Kumar ने न्यूरोलॉजिकल पुनर्वास और प्रमाण आधारित फिजियोथेरेपी उपचार पद्धतियों की उपयोगिता पर अपने विचार रखे।
वरिष्ठ विशेषज्ञ Dr. Arvind Kumar Nigam ने कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक्स), ऑर्थोटिक पुनर्वास तथा दिव्यांगजनों की कार्यात्मक स्वतंत्रता बढ़ाने में आधुनिक तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुनर्वास का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को आत्मनिर्भर और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करना भी है।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया, जिससे उन्हें आधुनिक पुनर्वास तकनीकों को बेहतर ढंग से समझने और अपने पेशेवर कार्य में लागू करने का अवसर मिला। कार्यक्रम के अंत में सभी विशिष्ट अतिथियों को फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत ज्ञानवर्धक, उपयोगी और पेशेवर विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम ने फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार, ज्ञान-साझाकरण और गुणवत्तापूर्ण उपचार सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी पहचान बनाई।































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