सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: TET से नहीं मिलेगी छूट, लेकिन शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक मिला अंतिम मौका

जनपत की खबर , 33

**सुप्रीम कोर्ट ने 65 से अधिक रिव्यू पिटीशन खारिज कीं, कहा— बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं; टीईटी पास करना ही होगा, आगे समय बढ़ाने की मांग भी नहीं होगी।**

 

नई दिल्ली। देशभर के लाखों शिक्षकों को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करने की समयसीमा एक वर्ष बढ़ा दी है। अब सेवा में कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि टीईटी से पूर्ण छूट की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी समीक्षा याचिकाएं (Review Petitions) खारिज कर दी गई हैं।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और मनमोहन की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों का संवैधानिक अधिकार है और शिक्षक सेवा में बने रहने के लिए न्यूनतम योग्यता मानकों को पूरा करना आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों, शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत शिक्षकों द्वारा दायर 65 से अधिक समीक्षा याचिकाओं को खारिज करते हुए अपने पूर्व निर्णय को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि 2009 के शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी निर्धारित समयसीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। यह तर्क स्वीकार नहीं किया गया कि पुराने शिक्षकों पर बाद में लागू नियमों को थोपना अनुचित है।

हालांकि, शिक्षकों और राज्यों की व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए अदालत ने विशेष संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए पहले निर्धारित दो वर्ष की अवधि को बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया। इसके तहत अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2027 के बजाय 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करने का अवसर मिलेगा। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भविष्य में समयसीमा बढ़ाने की कोई नई मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि शिक्षकों की नौकरी महत्वपूर्ण है, लेकिन बच्चों के शैक्षिक भविष्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि शिक्षक केवल अपनी सेवा बचाने पर ही ध्यान न दें, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभाएं।

फैसले का असर उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के उन हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा जिन्होंने अभी तक टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है। उत्तर प्रदेश में भी इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा था और बड़ी संख्या में शिक्षक समयसीमा बढ़ाने या छूट देने की मांग कर रहे थे। ऐसे शिक्षकों को अब अतिरिक्त एक वर्ष की राहत तो मिल गई है, लेकिन टीईटी उत्तीर्ण करना उनके लिए अनिवार्य बना रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि टीईटी परीक्षाएं नियमित रूप से आयोजित की जाएं, बेहतर होगा कि वर्ष में दो बार लगभग छह माह के अंतराल पर परीक्षा कराई जाए, ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सकें।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद National Council for Teacher Education द्वारा शिक्षण गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से टीईटी को अनिवार्य बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा फैसले में भी स्पष्ट कर दिया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह योग्यता अनिवार्य रहेगी और किसी भी प्रकार की सामान्य छूट नहीं दी जाएगी।

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