चिली के अपने समकक्ष से मिले जयशंकर, निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर

जनपत की खबर , 23

 नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यहां चिली के विदेश मंत्री फ्रांसिस्को पेरेज मैककेना के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों ने व्यापार विविधीकरण, प्रमुख वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने, सेवाओं की अर्थव्यवस्था को सुविधाजनक बनाने और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की।
चिली के विदेश मंत्री भारत की 7 दिवसीय (9-15 मई 2026) आधिकारिक यात्रा पर हैं। बैठक में दोनों पक्षों के बीच पारस्परिक हितों वाली प्राथमिकता वाली वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया।
डॉ. जयशंकर ने बैठक की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा आज सुबह चिली के विदेश मंत्री फ्रांसिस्को पेरेज मैककेना से मिलकर बहुत खुशी हुई। बाजारों और सोर्सिंग में विविधता लाने, प्राथमिकता वाली वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने और सेवा अर्थव्यवस्था को सुगम बनाने के लिए हमारे द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर बहुत अच्छी चर्चा हुई। बहुपक्षीय और बहुआयामी मंचों पर मिलकर काम करने पर सहमति बनी।
भारत और चिली के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) की दिशा में बातचीत तेज करने पर सहमति बनी है, जो मौजूदा अधिमान्य व्यापार समझौते (पीटीए) का विस्तार है। दोनों पक्षों ने सीईपीए के लिए वार्ता की संदर्भ शर्तों (टीओआर) पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते में डिजिटल सेवाएं, एमएसएमई और महत्वपूर्ण खनिज (जैसे लिथियम, तांबा, कोबाल्ट) शामिल हैं, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। यह समझौता भारत के लिए लैटिन अमेरिका में नए बाजार खोलने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने का प्रयास है।
इससे अलावा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने चिली के विदेश मंत्री मैककेना के साथ व्यापारिक वार्ताओं की समीक्षा की। मैककेना ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2026, एसोचैम और 'फोरम ऑफ इंडियन फूड इम्पोर्टर्स' के कार्यक्रमों में प्रमुख व्यापारिक दिग्गजों और शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर व्यावसायिक सहयोग पर चर्चा की।
मैककेना अपने भारत दौरे के दूसरे चरण में 13 मई की रात बेंगलुरु पहुंचेंगे। उनके बेंगलुरु दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत की 'सिलिकॉन वैली' के साथ नवाचार, सूचना प्रौद्योगिकी और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।

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