विपरीत परिस्थितियों में हुई संघ की स्थापना, आज 100 वर्ष की यात्रा पूरी: अनिल

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लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से रविवार को सुशांत गोल्फ सिटी, अंसल स्थित एक निजी विद्यालय में जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता रही।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता लखनऊ के विभाग प्रचारक अनिल जी ने संघ की स्थापना से लेकर 100 वर्षों की यात्रा पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि Keshav Baliram Hedgewar ने वर्ष 1925 में अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में संघ की स्थापना की थी। उस समय देश पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा था और समाज में स्वाभिमान व राष्ट्रीय चेतना कमजोर पड़ चुकी थी।
अनिल जी ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने चरित्र निर्माण और संगठन की शक्ति के माध्यम से समाज को जागृत करने का कार्य किया। उनका उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के जरिए राष्ट्र को सशक्त बनाना था, जिससे देश को पराधीनता से मुक्ति मिल सके और वह परम वैभव की ओर अग्रसर हो।
देश-विदेश में विस्तार
उन्होंने बताया कि आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य देश के लगभग 95 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुका है। 51,710 से अधिक स्थानों पर करीब 90,000 शाखाएं तथा 22,868 मिलन केंद्र संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही विदेशों में भी विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से संगठनात्मक गतिविधियां चल रही हैं।
अनिल जी ने कहा कि संघ का मानना है कि भारत केवल एक प्राचीन राष्ट्र ही नहीं, बल्कि चिरंतन राष्ट्र है। मातृभूमि की सेवा और आराधना ही स्वयंसेवकों का मूल उद्देश्य है।
गणमान्यजनों की उपस्थिति
कार्यक्रम में संघचालक डॉ. देवेश कुमार, हेमनारायण पाठक, रामकरण, भूपेश दूबे, आरपी, विमल, रामगोपाल काका, अरविन्द त्रिपाठी, बागीश, आनंद, बहादुर देशवाल, सुनील पांडेय, विजय कुमार स्वर्णकार, मीना, ओमप्रकाश, अजीत राय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
गोष्ठी के माध्यम से संगठन की विचारधारा, कार्य विस्तार और आगामी योजनाओं पर भी चर्चा की गई।

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