स्वच्छता से समृद्धि तक: बरेली की भरतौल ग्राम पंचायत बनी आत्मनिर्भर विकास का मॉडल

जनपत की खबर , 94

लखनऊ।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जनपद बरेली की ग्राम पंचायत भरतौल ने सतत विकास, संसाधन सृजन और सामुदायिक सहभागिता के बल पर ऐसा स्वच्छता मॉडल विकसित किया है, जो प्रदेश भर की ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरणा बन रहा है। भरतौल ने स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए स्वयं को एक आत्मनिर्भर पंचायत के रूप में स्थापित किया है।
ग्राम पंचायत में कचरा प्रबंधन को वैज्ञानिक स्वरूप देने के लिए वर्मी कम्पोस्ट केंद्र और रिसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) की स्थापना की गई है। यहां जैविक अपशिष्ट से तैयार खाद ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक पंचायत को वर्मी कम्पोस्ट बिक्री से ₹55,000 और डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण से ₹65,000 की आय प्राप्त हो चुकी है। इसके अतिरिक्त पंचायत के OSR खाते में ₹3,25,000 की राशि संचित है।
पंचायत इस संचित धनराशि का उपयोग भविष्य में आय बढ़ाने वाले विकास कार्यों में कर रही है। इसी क्रम में ग्राम पंचायत द्वारा गेस्ट हाउस का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे एक ओर बाहरी आगंतुकों को आवास सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के चलते ग्राम पंचायत कार्बन न्यूट्रल पुरस्कार के लिए भी पात्र हो गई है।
भरतौल की ये उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि यदि ग्राम पंचायतें दूरदर्शी सोच, पारदर्शिता और जनसहभागिता के साथ संसाधनों का प्रबंधन करें, तो वे विकास का सशक्त मॉडल बन सकती हैं। भरतौल आज प्रदेश की अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
पंचायती राज मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों का मुख्य उद्देश्य गांवों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। भरतौल जैसी मॉडल ग्राम पंचायतें सरकारी प्रयासों और जनसहयोग की सफलता का जीवंत उदाहरण हैं। ऐसे नवाचारों को पूरे प्रदेश में प्रोत्साहित किया जाएगा।
वहीं पंचायती राज विभाग के निदेशक श्री अमित कुमार सिंह ने कहा कि भरतौल ने यह सिद्ध कर दिया है कि नवाचार और जनभागीदारी से ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर बन सकती हैं। इसका OSR मॉडल प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों के लिए अनुकरणीय है।

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