दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन को नई गति, स्वैच्छिक संस्थाओं को मिलेगा सरकारी अनुदान
राष्ट्रीय Jan 07, 2026 at 05:35 PM , 130लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों में समान भागीदारी सुनिश्चित कर आत्मनिर्भर जीवन जी सकें तथा समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। इसी उद्देश्य से “दिव्यांगजन के सर्वांगीण पुनर्वासन हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता योजना” लागू की गई है, जिसके तहत पात्र स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान प्रदान किया जाएगा।
इस योजना के अंतर्गत दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में परिभाषित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं से प्रभावित व्यक्तियों के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण दिव्यांगजन इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं। योजना का उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांग बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक हस्तक्षेप, शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की सुविधाएं प्रदान कर उनके पुनर्वासन की एक सुदृढ़ व्यवस्था विकसित करना है।
प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश देते हुए कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि दिव्यांगजन शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और रोजगार के हर क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने बताया कि स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा दे रही है, जिससे दिव्यांगजनों के पुनर्वासन कार्यों को मजबूती मिलेगी।
मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि योजना के अंतर्गत अर्ली इंटरवेंशन सेंटरों की स्थापना, डे-केयर सेंटर एवं प्री-प्राइमरी विद्यालयों का संचालन, प्राथमिक से हाईस्कूल स्तर तक विशेष विद्यालयों का संचालन, दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, पाठ्य सामग्री निर्माण, ब्रेल एवं सहायक उपकरणों की उपलब्धता तथा दिव्यांगजनों से संबंधित पुस्तकालयों के संचालन जैसे कार्यों को अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा। इन प्रयासों का उद्देश्य दिव्यांगजनों की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना है।
उन्होंने यह भी बताया कि दिव्यांगजनों के पुनर्वासन में सरकार अनुभवी और समर्पित स्वैच्छिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है। इसके लिए पारदर्शी एवं तकनीक आधारित आवेदन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। केवल वही संस्थाएं पात्र होंगी जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत हों, नीति आयोग के एनजीओ दर्पण पोर्टल पर पंजीकृत हों, विशिष्ट पहचान संख्या रखती हों तथा दिव्यांगजनों के क्षेत्र में न्यूनतम दो वर्षों का कार्यानुभव रखती हों।
मंत्री कश्यप ने बताया कि प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा, जबकि अंतिम निर्णय निदेशालय स्तर पर गठित स्क्रीनिंग कमेटी लेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सहायता केवल वास्तविक, सक्रिय और प्रभावी संस्थाओं को ही मिले तथा सरकारी धन का समुचित और परिणामोन्मुखी उपयोग हो सके।
उन्होंने कहा कि सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक स्वैच्छिक संस्थाएं इस अभियान से जुड़कर दिव्यांगजनों के पुनर्वासन में सहभागी बन सकें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के संकल्प के साथ दिव्यांगजनों को सशक्त, शिक्षित और स्वावलंबी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।































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