भारत के लिए ऐतिहासिक गौरव का क्षण आफ़ताब-ए-शरीअत मौलाना सैयद क़लबे जवाद नक़वी को पहला “इमाम ख़ुमैनी वर्ल्ड अवॉर्ड”
जनपत की खबर Dec 18, 2025 at 02:35 PM , 125तेहरान / भारत | 18दिसंबर 2025
भारत के धार्मिक, बौद्धिक और सामाजिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। भारत की सुप्रीम धार्मिक शख़्सियत, आफ़ताब-ए-शरीअत हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद क़लबे जवाद नक़वी साहब को दुनिया के अत्यंत प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में शामिल “पहला इमाम ख़ुमैनी वर्ल्ड अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया है।
यह ऐतिहासिक सम्मान बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को तेहरान इंटरनेशनल समिट हॉल में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया। इस अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान तथा इस्लामी क्रांति के संस्थापक हज़रत इमाम ख़ुमैनी (रह.) के पौत्र मौलाना सैयद हसन ख़ुमैनी ने मौलाना क़लबे जवाद नक़वी साहब को यह सम्मान प्रदान किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर का गरिमामयी समारोह
समारोह में ईरान सहित विश्व के अनेक देशों से आए प्रख्यात विद्वान, बुद्धिजीवी, विचारक, शोधकर्ता और इमाम ख़ुमैनी की विचारधारा पर कार्य करने वाले विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य इमाम ख़ुमैनी (रह.) की जीवंत, गतिशील और जनकेंद्रित सोच को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देना रहा।
इमाम ख़ुमैनी वर्ल्ड अवॉर्ड का महत्व
इमाम ख़ुमैनी वर्ल्ड अवॉर्ड क़ौमी और बैनुल-अक़वामी स्तर का अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान है, जिसका उद्देश्य उन शख़्सियतों को पहचान देना है जिन्होंने इमाम ख़ुमैनी (रह.) की विचारधारा, सामाजिक न्याय, नैतिक मूल्यों, जनभागीदारी और भ्रष्टाचार-विरोधी सोच को व्यवहार में उतारा हो।
इस अवॉर्ड को पहली बार वर्ष 2013 में स्वीकृति मिली थी और 2023 में इसके नियमों, स्तर और संरचना में संशोधन के बाद इसे औपचारिक रूप से लागू किया गया। यह सम्मान दस वैचारिक विषयों पर आधारित है, जिनमें ज्ञान, समाज, राजनीति, संस्कृति और नैतिकता जैसे अहम आयाम शामिल हैं।
सैयद हसन ख़ुमैनी का संबोधन
समारोह को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद हसन ख़ुमैनी ने कहा कि यह पुरस्कार एक जीवंत विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी महान व्यक्तित्व का मूल्य इतिहास पर उसके प्रभाव से आँका जाता है और इमाम ख़ुमैनी (रह.) ने समकालीन इतिहास पर गहरा और स्थायी प्रभाव छोड़ा है।
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान का संदेश
ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान ने अपने संबोधन में कहा कि इमाम ख़ुमैनी को जनता पर अटूट विश्वास था। उन्होंने कहा—
“यदि जनता हमसे मुँह मोड़ ले, तो न क्रांति बचेगी और न ही धर्म।”
उन्होंने सभी संबंधित संस्थाओं और अधिकारियों को जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने की सलाह दी।
मौलाना क़लबे जवाद नक़वी साहब: हक़ और इंसाफ़ की निर्भीक आवाज़
मौलाना सैयद क़लबे जवाद नक़वी साहब भारत में इंसाफ़, वक़्फ़ की हिफ़ाज़त, सामाजिक न्याय और मज़लूमों की आवाज़ बनने के लिए जाने जाते हैं। उनकी बेबाकी, साफ़गोई और निडर रुख़ ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया है।
पहला इमाम ख़ुमैनी वर्ल्ड अवॉर्ड उनके उसी सैद्धांतिक और व्यावहारिक संघर्ष की वैश्विक स्वीकृति है।
भारत के लिए गर्व का क्षण
यह सम्मान न केवल एक व्यक्ति का, बल्कि भारत की दीनि, इल्मी और नैतिक परंपराओं का अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। यह अवॉर्ड उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा है जो सच, इंसाफ़ और इंसानी मूल्यों के लिए संघर्षरत हैं।































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